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धनबाद: झामुमो के जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में देबू महतो

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में चार से पांच लोगों के नाम की चर्चा इस वक्त खूब हो रही है. एक नाम देबू महतो का भी है. वह समय से झामुमो के साथ हैं. खुद को पार्टी का जन्मजात कार्यकर्ता समझते हैं. पार्टी में युवा मोर्चा का नगर अध्यक्ष, सहायक सचिव, सह सचिव, केंद्रीय सदस्य के साथ महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. वह झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के प्रदेश संयोजक भी हैं. फ़िलहाल धनबाद में पार्टी ने उन्हें कोई पद नहीं दिया है. वह एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी का काम कर रहे हैं. बावजूद पार्टी के जिला अध्यक्ष पद के लिये खुद को योग्य समझते हैं. इधर पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि जिला अध्यक्ष कौन होगा, अभी कहना मुश्किल है. 4 फरवरी के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. ज्ञात हो कि पिछले साल नवम्बर माह में पार्टी के जिला अध्यक्ष रमेश टुडू और पवन महतो के अंतर्कलह की वजह से पार्टी ने धनबाद जिले की सभी कमेटियों को भंग कर दिया था. अब पार्टी नए चेहरों को अवसर दे रही है. हाल ही में प्रखंड और वार्ड स्तर के प्रभारियों का पार्टी ने चयन किया है. इस संबंध में जिला अध्यक्ष पद के उम्मीदवार देबू महतो से बातचीत की गई, बातचीत को सवाल जवाब के रूप में ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया जा रहा है. सवाल : आप जिला अध्यक्ष की रेस में शामिल हैं, नई जिम्मेवारी के कितने करीब हैं. जबाब : मैं किसी रेस में नहीं हूं. पार्टी का साधारण कार्यकर्ता हूं. बिना किसी पद के भी काम कर रहा हूं. यदि पार्टी नई जिम्मेदारी देती है तो उसे भी पूरी ईमानदारी के साथ निभाने का काम करूंगा. सवाल : आप पार्टी में लंबे समय से है, जिला अध्यक्ष की दावेदारी इतनी देर से क्यों? जबाब : झारखंडी मानसिकता का आदमी हूं. पार्टी का व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं करता हूं. पद के लालच में कोई काम नहीं करता. पार्टी नेतृत्व जो भी जिम्मेदारी देती है, उसे समर्पण के साथ पूरा करता हूं. सवाल: झामुमो से कब जुड़े जवाब: मेरा जन्म 3 फरवरी को हुआ था और झामुमो का गठन 4 फरवरी को.  मैं अपने जन्म से झामुमो का हूं. पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन (गुरुजी) जब भी धनबाद आते थे, अलग झारखंड की मांग को लेकर उनके पीछे चल पड़ता था. उस वक्त काफी छोटा था, लेकिन झारखंडी का जज्बा उसी समय से था. 1990 में इस आंदोलन के कारण जेल भी गया था. झारखंड आंदोलनकारियों को हक दिलाने की बात हो या बीमार, पीड़ित को मदद पहुंचाना हो, पूरे समर्पण के साथ काम करता हूं. सवाल: यदि अध्यक्ष बन गए तो पार्टी के अंतर्कलह को कैसे दूर करेंगे. जवाब: पार्टी का अंतर्कलह समाप्त हो गया है. कोई विवाद नहीं है. यदि मुझे जिम्मेवारी मिली और किसी तरह का विवाद सामने आया तो उसे सबके साथ मिल बैठ कर समाधान किया जाएगा. [wpse_comments_template]

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