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धनबाद : धनतेरस पर पुराने चांदी के सिक्कों की मांग, कीमत भी मनमानी

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) धनतेरस पर सोने और चांदी के आभूषणों के बाद लोग पुराने चांदी के सिक्के की खोज में जुटे हैं. बाजार में डिमांड को देखते हुए ये के सिक्के निर्धारित मूल्य से कई गुना अधिक मूल्य पर मिल रहे हैं. जौहरी पुराने चांदी के सिक्कों की कमी बता कर लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं.

   लक्ष्मी-गणेश अंकित सिक्कों का भाव आसमान पर

बाजार में नया चांदी का सिक्का ( लक्ष्मी गणेश ) प्रिंट के साथ जहां 700 रुपये का मिल रहा है, वहीं पुराने चांदी के सिक्कों की कीमत 1200 से 2000 रुपये तक वसूली जा रही है. इस धनतेरस पर चांदी व सोने के सिक्कों के नए-नए डिजाइन बाजार में आ चुके हैं. जानकारी के अनुसार वर्ष 1939 तक चांदी के सिक्के मुद्रा के रूप में प्रयोग किए जाते थे. इसके बाद उन्हें बंद कर दिया गया था. लेकिन उस समय से ही चांदी के सिक्कों की मांग जारी है. लोग दीपावली पर पुराने चांदी के सिक्कों को खरीदना शुभ मानते हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सर्राफा व्यापारी ने बताया कि मार्केट में पुराने चांदी के सिक्कों की डिमांड अधिक है. हालत यह है कि कुछ व्यापारी पुराने चांदी के सिक्को में अंकित सन् ईस्वी के आधार पर उसे अपने चुनिंदा ग्राहकों को महंगे दाम पर बेच रहे हैं. सिक्के की खरीदारी के लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है.

   पुराने सिक्कों से करते हैं पूजा : रंजीत सिंह परमार

[caption id="attachment_452040" align="aligncenter" width="261"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/10/parmar-261x300.jpeg"

alt="" width="261" height="300" /> रंजीत सिंह परमार[/caption] सिक्का खरीदार रंजीत सिंह परमार का कहना है कि वह पुराने सिक्के से पूजा करते हैं. उन्होंने बताया कि सन् 1939 में सिक्के बंद हुए. . इसके पहले चांदी के सिक्के एक रुपये के सामान थे. एक रुपये से अधिक लागत के कारण इसे 1939 में बंद कर दिया गया. तब से चांदी के सिक्कों की मांग बढ़ती गई. इसी कारण नए सिक्के की कीमत जहां 700 रुपये है वहीं पुराने सिक्के की कीमत का कोई अनुमान नहीं. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-rangoli-competition-held-in-sant-mathews-high-school-rajganj/">धनबाद

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