Nirsa : निरसा (Nirsa) गोविंदपुर स्थित होटल मधुबन में श्रीराम कथा का तीसरे दिन रविवार 1 जनवरी को को संत विजय कौशल जी महाराज ने कहा भगवान स्वप्न में दर्शन देते हैं. प्रकट हो कर दर्शन नहीं देते. कभी भक्ति से वशीभूत होकर भगवान भक्त के समक्ष आते हैं तो प्रकाश के तेज से भक्त को आलोकित करते हैं. इस प्रकाश के आलोक से भक्त में एक तरह की मूर्च्छा आ जाती है. भक्त और भगवान के संबंधों की कथा की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मीरा के चरित्र का वर्णन किया. महाराज श्री ने कहा कि कथा अगर मन में है या कथा में डूबने से ही प्रभु की झांकी के स्वप्न दर्शन होते है. भक्त की चर्चा सुनने व करने से मन पवित्र होता है. जीवन में भक्ति की ललक बनती है. प्रभु भक्ति की वजह से मीरा के लिए निराकार से साकार हुए.
जब जब होई धर्म के हानि, बाढ़ हीं असुर अभिमानी
पापाचार, व्यभिचार, दुराचार के दमन और भक्तों की नवरस भरी भक्ति क्रीड़ा के संरक्षण हेतु भगवान अवतार लेते हैं भगवान जब भक्त को भवसागर में फंसता हुआ देखता है तो बिना किसी पुकार और याचना के स्वतः ही अवतार धारण करते हैं. भगवान के निर्गुण, निराकार, साकार आदि की चर्चा करते हैं. भगवान स्वयं तो भक्त के दिये हुए रूप और नाम से जाने जाते हैं. कथा सदैव सावधानी से सुनना चाहिए, अन्यथा भ्रांति उत्पन्न होती है. उन्होंने कहा कि राष्ट्र के धर्म की रक्षा हेतु कभी कभी व्यक्तिगत धर्म का त्यागना पाप नहीं है. इससे पूर्व मुख्य यजमान शंभूनाथ अग्रवाल ने सपरिवार व्यासपीठ की पूजा की . व्यासपीठ पर आसीन होकर संत श्री विजय कौशल जी महाराज ने नंदलाल अग्रवाल, बलराम अग्रवाल, पिंकी अग्रवाल, पायल अग्रवाल, श्याम सुंदर केजरीवाल, सुभद्रा केजरीवाल को व्यासपीठ से तिलक किया. गुरुवर ही बेड़ा करते हैं बेड़ा पार
महाराज श्री ने बताया कि जननी, जनक (पिता), बंधु, सुत (पुत्र), दारा (पत्नी), तनु, धनु, भवन, स्वर्ग और परिवार ये नौ स्थानों पर ममता यानी प्रेम प्राप्त होता है. गुरु वह है जिसको कोई वासना विकार हिला नही सकता है. गुरु ही बेड़ा पार करता है. गुरु की महत्ता पवित्र है, लेकिन आजकल गुरु है कहां, सब गुरु घंटाल हो गए हैं. [wpse_comments_template]
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