Ram Murti Pathak Dhanbad : पुराना बाजार के शंभू धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन 20 अगस्त को कथा वाचक श्रीहित प्रताप चंद्र गोस्वामी ने कहा कि श्रीमद्भागवत में वह सारे तत्व हैं, जिनके माध्यम से जीव अपना तो कल्याण कर ही सकता है, साथ में अपने से जुड़े हुए लोगों का भी कल्याण कर सकता है. कथा का आयोजन मारवाड़ी युवा मंच और श्री राधा बल्लभ सत्संग समिति ने किया है. श्री गोस्वामी ने कहा कि जीवन में व्यक्ति को एक बार अवश्य भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए. बिना आमंत्रण के भी अगर कहीं भागवत कथा हो रही है, तो वहां अवश्य जाना चाहिए. इससे जीव का कल्याण होता है. कहा कि गुरु का परिचय उनका वेश नहीं होता, उनका तो मुख्य वेश उनका गुण होता है. आज के समय वास्तविक गुरु की पहचान करना कठिन हो गया है. सहनशीलता, करुणा, सबको अपना मानना, किसी से शत्रुता नहीं रखना, निष्कामता एवं परोपकारी होना गुरु की असली पहचान है. कभी भी प्रतिष्ठा या प्रसिद्धि देखकर किसी को गुरु न बनाएं अपितु उनके गुणों को देखें. सच्चा गुरु आपको भगवान के चरण कमलों तक पहुंचा कर उनका साक्षात्कार करा देता है, वहीं केवल नामी गुरु संसार के मायाजाल में ही उलझा देगा. उनजोने कहा कि हमारे यहां संतों को स्वामी कहने की परंपरा है. इसका एकमात्र कारण यह है कि स्वामी केवल उन्हें ही बोला जाता है, जिसने इंद्रियों को संयम में कर रखा हो. जिसका मन चंचल नहीं होता, जिसकी इंद्रिया इधर-उधर नहीं भटकती हैं. इसलिए हमारी संस्कृति में संतों को स्वामी कहकर संबोधित किया जाता है. भगवान के अवतारों के विषय में उन्होंने कहा कि श्रीराम और श्रीकृष्ण साक्षात अवतार थे. पूर्णावतार, अंशावतार, विशेष अवतार और नित्यावतार ये चार प्रकार के अवतार होते हैं. इनके प्रकट होने के अलग-अलग कारण होते हैं. भगवान या तो धर्म की पुन: स्थापना के लिए या धर्म पर आघात करने वालों के मूलोच्छेद के लिए अवतार लेते हैं अथवा भक्त की भक्ति से अभिभूत होकर दर्शन देकर उसका कल्याण करने के लिए अवतरित होते हैं. कुछ शंकालु लोग कहते हैं कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण अवतार नहीं, महापुरुष हैं. श्री कृष्ण अवतार नहीं केवल योगीराज हैं. जबकि भगवान कृष्ण ने गीता में स्वयं कहा है कि वे ही भगवान हैं. शायद ही किसी अन्य शास्त्र या धर्म में किसी ने ऐसा कहा हो. भगवान के भजन तथा मानवोचित सत्कर्म करते रहने में ही कल्याण है. तर्क-वितर्क से बुद्धि भ्रम पैदा होता है. अत: दृढ़ विश्वास, दृढ़ निष्ठा ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं. अवतारों का कारण जीवन में भगवान के प्रति निष्ठा भक्ति सिद्घ करना है और जो इन अवतारों की कथा श्रवण करता है, उसके सारे पाप दूर हो जाते है. वह जन्म बंधन के सारे कष्टों से मुक्त हो जाता है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/thirteen-consecutive-hours-of-rain-in-dhanbad-trees-fell-bad-electricity-situation/">धनबाद
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धनबाद :प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि देखकर किसी को गुरु न बनाएं-श्रीहित प्रताप चंद्र गोस्वामी

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