जिले का कृषि बहुल क्षेत्र बलियापुर के किसानों को अब धान के बाद गेहूं फसल की चिंता सताने लगी है. मानसून की दगाबाजी से इस बार क्षेत्र के तालाब, डोभा समेत अन्य जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं जमा हो सका है. कई तो पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि कुछ में तलहटी में पानी है. गेहूं व सब्जी की फसलों की सिंचाई इन्हीं जलाशयों पर निर्भर है. गेहूं की अच्छी उपज के लिए फसल की तीन से चार बार सिंचाई जरूरी है. ऐसे में धान के बाद अब गेहूं की फसल पर भी संकट मंडराने लगा है. बलियापुर के किसान लखीराम महतो, राम प्रसाद महतो, शिव प्रसाद महतो, कार्तिक कुमार महतो, रूपन महतो बताया कि कम बारिश के कारण धान की खेती ठीक से नहीं हो सकी. जो हुई वह भी सूखने के कगार पर है. 20-25 दिन बाद गेहूं की बोवनी शुरू हो जाएगी. अगर बारिश नहीं हुई और जलाशय नहीं भरे, तो गेहूं की फसल पर भी आफत है. क्योंकि गेहूं की सिंचाई इन्हीं जलाशयों पर निर्भर है.
दो दिन अच्छी बारिश हो जाए तो भर जाएंगे तालाब : ललित दास
कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय विज्ञानिक ललित कुमार दास ने कहा कि कम बारिश होने से किसानों को गेहूं की फसल को लेकर अभी से चिंता सताने लगी है. लेकिन उन्हें अभी हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है. सितंबर के अंत तक बारिश का समय है. अगर 2 दिन भी अच्छी बारिश हो जाए, तो जलाशय भर जाएंगे और गेहूं की पैदावार अच्छी होगी. किसान पहले धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई शुरू करते थे. लेकिन इस बार धान की फसल तो हुई नहीं, इसलिए वे गेहूं की फसल जल्द लगाने की सोच रहे हैं. गेहूं की बुवाई का समय 15 अक्टूबर से है. यह भी पढ़ें : धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-mafia-gang-did-not-like-my-husbands-progress-then-murdered-him-aabo-debi/">धनबाद:माफिया गिरोह को नहीं पसंद थी मेरे पति की उन्नति तो कर दी हत्या : आबो देबी [wpse_comments_template]

Leave a Comment