Dhanbad : शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ( एसएनएमएमसीएच ) में टूटे हाथ, पांव लेकर आये गरीब मरीजों की मुसीबत कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है. मरीज टूटी हड्डियों को जोड़वाने के लिए महीनों से इंतज़ार में हैं. लेकिन ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है. ये धनबाद के अलावा पड़ोसी जिले देवघर, जामताड़ा, गिरीडीह के इन मरीजों को डॉक्टर के अलावा किसी मसीहा की भी तलाश है. दो जून को एसएनएमएमसीएच के हड्डी वार्ड का नजारा ही कुछ और देखने को मिला. एक दर्जन से भी ज्यादा मरीज ऑपरेशन की आशा में बैठे मिले. कोई 15 दिन से तो कोई 25 दिन तो कोई एक महीना से ऑपरेशन की आस लगाए बैठा है. उनका दर्द बढ़ रहा है, मगर ऑपरेशन रूपी कारगर दवा नहीं मिल रही.
पहले पांव टूटा, अब टूट रही उम्मीद
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दुर्गा मोहली[/caption] जामताड़ा जिले के नारायणपुर गांव निवासी दुर्गा मोहाली अपने टूटे पांव लेकर हड्डी वार्ड में पिछले 15 दिनों से भर्ती हैं. मगर अबतक उनके का ऑपरेशन नहीं किया गया. उनका पेशा से बांस का सूप बनाने का है. कहते हैं कि वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करने में असमर्थ हैं और यहां भी लगभग 15 दिन इंतजार के बाद इलाज नहीं हो पाया है.
घर-बार छोड़ कर रहे ऑपरेशन का इंतजार
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सुमन कुमारी[/caption] गिरिडीह की सुमन कुमारी पिछले दिनों छत से गिर पड़ी. दोनों पैर टूट गए. एक पैर में स्टील लगाना है. 18 दिन से ऑपरेशन का इंतजार कर रही है. परिजनों का कहना है कि विगत18 दिनों में घर की माली हालत खारब हो गयी है. इलाज के लिए घर द्वार छोड़कर धनबाद में रहना पड़ रहा है.
20 दिन से लगा रहे ऑपरेशन की गुहार
गिरिडीह की ही 6 वर्षीय नैना कुमारी का बायां हाथ खेलने में टूट गया. परिजनों ने एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया. यहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने की बात कही. लेकिन लगभग 20 दिन बाद भी ऑपरेशन नहीं हुआ. परिजन नंदकिशोर गोस्वामी का कहना है कि इलाज के नाम पर विगत20 दिनों से खानापूर्ति चल रही है.
जांच में थोड़ा समय तो लगता है : डॉ डीपी भूषण
इस मामले में ऑर्थो विभाग के एचओडी डॉ डीपी भूषण का कहना है कि वार्ड में भर्ती तमाम मरीजों का बेहतर इलाज करने की कोशिश है. ऑपरेशन से पहले मरीजों की कई जांच करनी पड़ती है. इसमें थोड़ा समय लग जाता है. [wpse_comments_template]
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