Search

धनबाद : झरिया जलापूर्ति योजना पर कछुआ चाल से लग रहा ग्रहण, 5 साल में महज 52 प्रतिशत हुआ काम

10 मई 2023 तक पूरा होना था काम, अग्रेजों के जमाने से चल रहे मोटर पंप भी नहीं बदला जा सका
Mithilesh Kumar Dhanbad : झरिया जलापूर्ति योजना के पांच साल पूरे हो गये. लेकिन इन पांच सालों में पाइप बिछाने का काम महज 52 प्रतिशत ही हो सका है. अभी तक अग्रेजों के जमाने से चल रहे मोटर पंप को भी नहीं बदला जा सका है. योजना के नाम पर राजनीति और सिर्फ बैठको का दौर चल रहा है. अब तो योजना का काम कर रही जेएमसी ने एक नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. कम्पनी के प्रतिनिधि मोटर पंप लगाने के लिए अलग से पैसे की डिमांड करने लगे है. हालाकि नगर विकास विभाग ने बजट बढ़ाने से इंकार कर दिया है. पूर्व में तय की गई राशि में ही पूरा काम करने का विभाग ने आदेश दिया है. इसे लेकर जेएमसी के अधिकारी असमजंस में है. यही हाल रहा तो योजना पूरी होने में और दो से तीन साल लग सकता है.

2019 में 310 करोड़ की बनी थी योजना

झरिया में भूमिगत आग के बाद सबसे बड़ी समस्या पानी की है. एक लाख से अधिक आबादी सप्लाई वाटर पर निर्भर है. अंग्रेजों के जमाने की पाइप लाइन और मोटर पंप से आज तक काम लिया जा रहा है. आए दिन पाइप फटने, पंप में खराबी आने की समस्या बनी रहती है. कई बार एक-एक सप्ताह तक पानी नहीं आता है. जिसके मदद्नेज़र 15 अक्टूबर 2019 को 310.6 करोड़ की झरिया जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी. पांच साल बाद भी बरसात में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर है.

सिर्फ क्रेडिट लेने की मची है होड़

झरिया में लोगों की जरूरत से राजनीतिक लड़ाई ज्यादा जरूरी हो गई है. झरिया में अपराध, हिंसा, बिजली संकट, भू-धसान, दुर्घटना की बात हो या जलापूर्ति योजना की, इन सभी मुद्दों पर एक ही घराने की दो बहुओं के बीच सिर्फ क्रेडिट लेने की होड़ मची है. इनकी आपसी लड़ाई में झरिया के लोगों का बंटाधार हो रहा है. अभी पिछले माह 25  जुलाई को भाजपा नेत्री रागिनी सिंह ने जलापूर्ति की समस्या को लेकर उपायुक्त को पत्र सौंपा था, जिसमें पुराने मोटर पंप बदलने की मांग की गई थी. इसके कुछ दिन बाद यानी 2 अगस्त को झरिया विधायक पूर्णिमा सिंह ने जलकर को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र दिया था. जिसमे बकाए जलकर की राशि एक मुश्त न लेकर किस्तों में करने और विलंब शुल्क माफ करने की मांग की थी. लेकिन दोनों की मांग आज तक पूरी नहीं हुई है, लेकिन इन मुद्दों को लेकर दोनों नेत्रिया चर्चा में जरूर रही.

नए डेडलाइन में 10 मई 2023 तक पूरा होना था काम

झमाडा के सहायक अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि योजना से 33 हजार घरों में पानी पहुंचाना था. इसके लिए जामाडोबा में 43.5 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाना था. इसके अलावा झरिया, भूलन बरारी में संप बनाना था. इसके अलावा पुटकी और करकेंद में संप ओर पंप हाउस बनाना था. 22 पुराने मोटर भी बदले जाने थे. यह काम 2021 नवंबर तक पूरा होना था. लेकिन कोरोना के कारण एक्सटेंशन मिला. नए डेडलाइन में 10 मई 2023 तक काम पूरा होना था, लेकिन अभी कई काम अधूरे है. कंपनी का काम संतोषजनक नहीं है. काम में देरी होने के कारण हर साल 10 प्रतिशत पेनाल्टी लगायी जा रही है. नए मोटर पंप लगाने के लिए 3 माह समय जिला प्रशासन की ओर से दिया गया है, लेकिन अभी नया पंप लगाने का काम शुरू नहीं हुआ है. यह">https://lagatar.in/dhanbad-workshop-on-general-safety-in-underground-mines-organized-at-jharia-division-of-tata-steel/">यह

भी पढ़ें : धनबाद : टाटा स्टील के झरिया डिवीजन में भूमिगत खदानों में सामान्य सुरक्षा पर कार्यशाला का आयोजन [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

बेहतर न्यूज़ अनुभव
ब्राउज़र में ही
//