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धनबाद : बुराई सताती है, मारती नहीं : विजय कौशल

 
Nirsa : निरसा (Nirsa) गोविंदपुर स्थित होटल मधुबन में श्रीराम कथा के छठे दिन 4 जनवरी बुधवार को संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि किसी राजा के समक्ष कोई संत अपने प्राणों की रक्षा हेतु याचना करे अथवा आग्रह करे तो ऐसी स्थिति राजा के लिए मृत्यु समान है. कारण, राजा का नैतिक दायित्व है संत की रक्षा करने का. बुराई सताती है, मारती नहीं जीवन में अगर एकबार दुर्गुण आ जाये तो जाते नहीं हैं. बुराई और अच्छाई में समझौता नहीं हो सकता. अच्छाई और बुराई में जब भी समझौता हुआ, समाज मे बुराई और ढीठ हो जाती है. महाराज श्री ने कहा बोलन, विनय, आज्ञा का तरीका जीव को प्रभु श्री राम से सीखना चाहिए. श्रीराम ने ज्ञान की प्रतीक ताड़का का वध इसीलिए किया, क्योंकि वह सब उचित अनुचित जानने के बाद भी असत्य, अंधकार, आतंक की हिमायती थी. साधु बचाता है जबकि सांसारिक फंसाता है. अहल्या चरित्र की चर्चा करते हुए महाराज श्री ने बताया कि प्रभु स्वयं अहिल्या के द्वार जाते हैं और जीव मंदिर, मंदिर, द्वारे-द्वारे भटकता है।  सांसारिक दृष्टि में इस प्रसंग से समझना चाहिए कि कहां भूल होती है. भोगों के प्रति आकर्षण का बीज अगर में है तो हर हाल में अपने अनुकूल मौसम में पल्लवित होता ही है.

"उत्कर्ष" में गुरुवार को युवाओं से रु-ब-रु होंगे

गुरुवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक के विशेष मोटिवेशनल सेशन में संत विजय कौशल जी महाराज युवाओं को केंद्रित करते हुए संबोधित करेंगे. इस सत्र में युवाओं सहित उनके साथ आये हुए अभिभावकों की शंकाओं और संदेह का समाधान करेंगे. उन्हें संकल्प से समृद्धि प्राप्त करने का मार्ग बताएंगे. इस सत्र में कोई भी युवा शामिल हो सकता है. [wpse_comments_template]
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