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धनबाद: परीक्षा, डिग्री, नौकरी या विफल प्रेम मानव जीवन का निर्णय नहीं कर सकते: डॉ शिल्पी

 
Dhanbad :  धनबाद के आर एस मोर कॉलेज गोविंदपुर में 18 मई  गुरुवार को मनोविज्ञान विभाग की ओर से युवाओं में तनाव एवं अवसाद मुद्दे व चुनौतियां विषयक सेमिनार का आयोजन किया गया. इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य पर पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई सेमिनार की मुख्य वक्ता सह मुख्य अतिथि पीएमसीएच की न्यूरोसाइकियाट्रिस्ट की विभागाध्यक्ष डॉ शिल्पी कुमारी थीं. विशिष्ट अतिथि बाल कल्याण कमेटी के चेयरपर्सन डॉ उत्तम मुखर्जी व चाइल्ड प्रोटेक्शन अधिकारी आनंद कुमार भी मौजूद थे.

 स्वयं को स्वीकार कर खुद से करें प्यार

सेमिनार में मुख्य अतिथि डॉ शिल्पी कुमारी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की निम्न शर्त है स्वयं को स्वीकार कर खुद से प्यार करना.  उन्होंने कहा कि युवाओं के अंदर निरंतर विकास की अभिलाषा होनी चाहिए. खुद के अंदर जो शौक प्रस्फुटित होते हैं, उन्हें पंख देकर उन्मुक्त आकाश में उड़ान भरनाचाहिए. ऐसा होने से मानसिक अवसाद निकट नहीं आता. उन्होंने कहा कि एक परीक्षा, डिग्री, नौकरी या एक विफल प्रेम मानव जीवन का निर्णय नहीं कर सकती. मानव जीवन को इनसे परे भी समझा जाना चाहिए. कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रवीण सिंह ने कहा कि  भारत में मानसिक समस्याओं के निराकरण हेतु आधारभूत संरचना की बेहद कमी है और प्रत्येक 1 लाख की आबादी पर मात्र 0.75 मनोचिकित्सक हैं, जबकि उनकी न्यूनतम संख्या 3 होनी चाहिए.

   सामाजिक पक्ष व रुढ़िवादिता को सुलझाना भी जरूरी

उन्होंने कहा कि युवा देश की पूंजी हैं. उसे यूं ही बर्बाद हो जाने और मरने के लिये नहीं छोड़ा जा सकता. उसे साथ लेकर चलने, उसकी भावनाओं के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी धनबाद के चेयरपर्सन डॉ उत्तम मुखर्जी ने कहा कि झारखंड में सुकून और राहत की ज़िंदगी है. यहां से मानसिक स्वास्थ्य की ज्योति प्रज्ज्वलित हो तो इसकी लौ दूर तक जाएगी. चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर आनंद कुमार ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक पक्ष और रुढ़िवादिता को सुलझाना सबसे जरूरी है. सेमिनार सफल बनाने में डॉ नीना कुमारी, प्रो प्रकाश कुमार प्रसाद, डॉ राजेन्द्र प्रताप, डॉ श्याम किशोर सिंह, प्रदीप महतो, सुजीत मंडल, सुप्रीति चक्रवर्ती एवं अन्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा. [wpse_comments_template]
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