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धनबाद : शहीद गुरुदास चटर्जी के शहादत दिवस समारोह की निरसा में व्यापक तैयारी

शोषित-पीड़ितों की आवाज थे गुरुदास : अरूप

Dhanbad/Nirsa : बिहार विधानसभा में लगातार तीन टर्म तक निरसा विधानसभा की नुमाइंदगी करने वाले मासस नेता गुरुदास चटर्जी के 23वें शहादत दिवस को लेकर व्यापक तैयारी की जा रही है. कोयला माफियाओं की आंख की किरकिरी बने गुरुदास चटर्जी की 14 अप्रैल 2000 को धनबाद-निरसा के बीच देवली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मजदूर, किसान, शोषित, दलित व पीड़ितों की आवाज को बुलंद करने वाले मासस नेता गुरुदास के शहादत दिवस पर 14 अप्रैल को प्रत्येक वर्ष की भांति इस साल भी हजारों की संख्या में लोग देवली पहुंचकर शहीद स्थल पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार हैं. कार्यक्रम की सफलता के लिए स्वर्गीय चटर्जी के पुत्र और निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी समेत मासस के अगुवा साथी गांव-गांव में बैठक व जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को शहादत दिवस के दिन देवली चलने की अपील कर रहे हैं. शहीद स्थल की साफ-सफाई का काम जोरों पर जारी है. शहीद वेदी की रंगाई-पुताई की जा रही है. वेदी के बगल में भव्य पंडाल का निर्माण किया जा रहा है. मासस कार्यकर्ता देवली स्थित स्मारक स्थल, निरसा राजा कोलियरी समेत चिरकुंडा शहीद चौक पर गुरदास चटर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. कार्यक्रम में पूर्व विधायक अरूप चटर्जी, उनकी पत्नी आनंदिता चटर्जी, पुत्री भूमि चटर्जी के अलावा सिंदरी के पूर्व विधायक आनंद महतो, बगोदर के विधायक विनोद सिंह, हजारीबाग के मिथिलेश सिंह, मार्क्सवादी युवा मोर्चा केंद्रीय कार्यकारिणी के अध्यक्ष जगदीश रवानी समेत निरसा, चिरकुंडा, कुमारधुबी, मैथन, पंचेत, गोविंदपुर, बलियापुर, सिंदरी, टुंडी, धनबाद, राजगंज, तोपचांची, चंदनकियारी, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़ से हजारों की संख्या में लोग देवली पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.

निरसा में मासस कार्यालय से निकलेगी विशाल रैली

[caption id="attachment_603537" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/arup-chaterjee-mcc-300x300.jpg"

alt="" width="300" height="300" /> अरूप चटर्जी, पूर्व विधायक, निरसा[/caption] पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने बताया कि 14 अप्रैल को उनके नेतृत्व में निरसा के पार्टी कार्यालय से विशाल रैली निकाली जाएगी. रैली में सैकड़ों की संख्या में दो व चार पहिया वाहनों पर सवार होकर कार्यकर्ता गाजे-बाजे के साथ शहादत स्थल देवली पहुंचेंगे. अरूप ने बताया कि शहीद पिता गुरुदास चटर्जी गरीब, शोषित और पिछड़ों के सच्चे हितैषी थे. आज की राजनीति चमक-दमक व दिखावे की हो गई है. निरसा शुरू से ही संघर्ष व आंदोलन की धरती रही है. मेरे पिता की कार्यशैली से सिर्फ निरसा ही नहीं, बल्कि धनबाद और बोकारो के मजदूर व किसान अपने आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए बुलाते थे. आज उनकी कमी सभी को महसूस हो रही है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-15-people-of-sikh-community-drank-nectar-in-bada-gurdwara/">धनबाद

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