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धनबाद के किसानों को मोती की खेती में कोई दिलचस्पी नहीं

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) जलाशयों में मोती की खेती के लिए धनबाद जिले के किसानों की कोई रुचि नहीं है. यह सच्चाई किसानों को मत्स्य विभाग के दिये गए प्रस्ताव और उसके जवाब में चुप्पी से प्रकट हुई है. मत्स्य विभाग ने वर्ष 2020 में जिले के कई जलाशयों को मोती की खेती के लिए अनुकूल बताया था. दो वर्ष पूर्व जिला मत्स्य विभाग की ओर से तैयारी भी शुरू कर दी गयी थी. मत्स्य विभाग को पर्ल फार्मिंग के लिए किसानों का चयन कर ट्रेनिंग देना था. ऐसा निर्देश मुख्यालय से मिला था. परंतु दो वर्ष से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी मत्स्य विभाग को किसानों का कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ. विभाग किसी किसान को अब तक ट्रेनिंग नहीं दे सका है.

  मैथन व तोपचांची झील पर्ल फार्मिंग के लिए उपयुक्त

धनबाद के जलाशयों में पर्ल की फार्मिंग ( मोती की खेती ) के लिए वर्ष 2020 में जिला मत्स्य विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा था. कई जलाशयों को मोती की खेती के लिए अनुकूल बताया गया था. मैथन व तोपचांची झील में बड़े पैमाने पर पर्ल फार्मिंग शुरू करने की संभावना भी जताई गयी थी. प्रस्ताव में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया था कि पर्ल फार्मिंग से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं. मुख्यालय से प्रस्ताव मंजूर भी हो गया है. पर्ल फार्मिंग के लिए किसानों का चयन कर ट्रेनिंग देने का निर्देश भी दिया जा चुका है. मगर सारी योजना धरी की धरी रह गई. इस योजना का लाभ लेने के लिए कोई किसान आगे नहीं आया..

 50 हज़ार से अधिक किसान व मछुआरे उदसीन क्यों

जिले में लगभग 50 हज़ार से अधिक किसान व मछुआरे हैं, जो राज्य तथा केंद्र सरकार की PMSY ( प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना ) के तहत कई योजनाओं का लाभ ले रहे हैं. इसके अलावा लाभुक बत्तख, मुर्गी व बकरी पालन समेत कई योजनाओं से जुड़े हुए हैं. मगर पर्ल फार्मिंग की ओर किसानों का झुकाव नहीं के बराबर है.

  फायदेमंद है मोती की खेती: मुजाहिद अंसारी

जिला मत्स्य पदाधिकारी मुजाहिद अंसारी की मानें तो 2 वर्ष बाद भी पर्ल फार्मिंग के लिए कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ. इसके पीछे के कारणों का भी पता नहीं है. उन्होंने बताया कि सरकार की कई अन्य योजनाओं का लाभ तो वे ले रहे हैं. जिला मत्स्य पदाधिकारी का कहना  है कि जिले के जलाशयों में मीठा पानी है, जो सीप के लिए अनुकूल होता है. यदि धनबाद में मोती का उत्पादन किया जाए तो किसानों के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होगा. एक सीप लगभग आठ से 12 रुपये की होती है. वही बाजार मे एक मिमी से 20 मिमी सीप के मोती का दाम करीब 300 से 1500 रुपये होता है. आजकल डिजायनर मोतियों को पसंद किया जा रहा है, जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. [wpse_comments_template]  

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