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धनबाद : चोरी का कोयला आपूर्ति करने को लेकर दो गुटों में जमकर मारपीट, एक राउंड फायरिंग

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निरसा के कापासारा आउटसोर्सिंग के अवैध खनन स्थल के पास की घटना, ख़ाकी ने दोनों में कराया समझौता
Maithon : गलफरबाड़ी ओपी क्षेत्र के दुधियापानी स्थित रिफैक्ट्रियों में चोरी का कोयला आपूर्ति करने वाले एजेंट के दो गुटों में शुक्रवार 28 जुलाई की शाम जमकर मारपीट हुई. घटना कापासारा आउटसोर्सिंग के अवैध खनन स्थल के पास घटित हुई. मारपीट के दौरान एक राउंड हवाई फायरिंग की भी सूचना है. घटना में साइकिल से रिफैक्ट्रियों में चोरी का कोयला पहुंचाने वाले स्थानीय तीन चार युवक के घायल होने की सूचना है. मौके पर ख़ाकी के लोग भी पहुंचे और किसी तरह दोनों गुटों को समझा बुझाकर मामला शांत कराया. घटना के बाद से क्षेत्र में कोयला चोरों के साथ-साथ रिफैक्ट्री संचालकों में भी हड़कंप मचा हुआ है.

क्या है पूरा मामला

दुधियापानी में यादव और सिंह दो एजेंट है, जो कमीशन पर चोरी व अवैध खनित कोयला रिफैक्ट्रियों में पहुंचवाता है. कोयला खदान से साइकिल और बाइक के ज़रिए चोरी का कोयला रिफैक्ट्रियों में पहुंचाने का दो ग्रुप है. एक ग्रुप यादव और दूसरा सिंह के लिये काम करता है. इन दोनों गुटों में हमेशा संघर्ष होता रहता है. शुक्रवार को भी ऐसा ही हुआ. रेट को लेकर एक गुट ने रिफैक्ट्री में कोयला भेजने से मना कर दिया. दूसरा गुट पुराने रेट पर ही कोयला आपूर्ति कर रहा था. जिसका विरोध करने पर दोनों गुट आपस में भिड़ गये. देखते-देखते दोनों गुट के समर्थक जुट गये और बवाल शुरू हो गया. दोनों ओर से लाठी डण्डा और हॉकी स्टीक का जमकर उपयोग हुआ. सिंह गुट की ओर से एक राउंड फायरिंग की भी सूचना है. घटना में तीन चार लोगों के घायल होने की ख़बर है. मारपीट की सूचना पर ख़ाकी वर्दी वाले भी मौके पर पहुंचे और झगड़ा शांत कराया. दोनों गुटों के बीच समझौता करा दिया गया. नये रेट पर कोयला आपूर्ति पर सहमति बन गयी है.

क्या है पूरा खेल

इन दिनों चोरी का कोयला पोड़ा कर यूपी, बंगाल, बिहार सहित अन्य राज्यों में भेजने का नया ट्रेंड चला हुआ है. दुधियापानी में कई माह से यह खेल डंके की चोट पर चल रहा है. लोकल पुलिस ने ईंट पकाने के नाम पर रिफैक्ट्रियों में चोरी का कोयला लेने की छुट दे रखी है. इसके एवज में प्रति माह हर रिफ्रैक्ट्री से खाकी के साहबों को हर महीने नज़राना भी मिलता है. ईंट पकाने में जहां दस से पन्द्रह टन कोयला लगना चाहिये, वहीं भट्ठे में जान बूझकर 20-25 टन कोयला डाल दिया जाता है. ईंट पकाने के बाद भट्ठे से निकला पोड़ा कोयला छाई के नाम पर चिरकुण्डा का चर्चित छाई माफिया को बेच दिया जाता है. वह व्यक्ति शातिर तरीके से पोड़ा कोयला को छाई के नाम पर यूपी, बिहार, बंगाल सहित अन्य राज्यों की मंडी में ट्रकों से भेज देता है. यह">https://lagatar.in/dhanbad-due-to-illegal-mining-in-nirsa-a-lot-of-earth-a-crack-in-the-radius-of-100-meters-from-the-landslide-two-died/">यह

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