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धनबाद : महुआ के लालच में जंगलों में लगा रहे आग

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Kumar Balram Tundi : गर्मी शुरू होने के साथ ही टुंडी, तोपचांची व आसपास के जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं. रात के अंधेरे में हर दिन इलाके के जंगलों में आग की लपटें देखी जा रही हैं. दरअसल, यह आग लगती नहीं, बल्‍क‍ि लगाई जाती है. महुआ के फूल चुनने के लालच में ग्रामीण जमीन पर गिरे पत्‍तों व खर-पतवार को साफ करने के लिए जंगल में आग लगा देते हैं, ताकि वे पेड़ के नीचे आसानी से महुआ चुन सकें. इससे जंगली जानवरों का जीवन तो तबाह होता ही है, पेड़-पौधों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है. ऐसा पहली बार नहीं है. जंगलों में हर साल गर्मियों में आग लगने की घटनाएं आम हैं. मार्च से लेकर मई तक जंगलों में आग की लपटें दिखती हैं. यह सिलसिला वर्षों से बदस्तूर जारी है. ग्रामीणों ने बताया कि पतझड़ के कारण जंगल में जमीन पर काफी मात्रा में सूखे पत्ते पड़े रहते हैं. इसके चलते उन्‍हें महुआ के फूल चुनने में परेशानी होती है. पत्‍तों को जलाने के लिए उन्‍हें आग लगानी पड़ती है.

तपिश के साथ ही उठने लगीं लपटें

गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ ही जिले के जंगलों में आग की लपटें भी उठने लगी हैं. यह सिलसिला शाम होने के साथ ही शुरू हो जाता है. धनबाद जिले के अमूमन सभी जंगलों में ऐसा देखा जा रहा है. सुदूरवर्ती टुंडी, तोपचांची,  गंगापुर आदि क्षेत्रों के जंगलों में हर रोज आग लग रही है. बताते चलें कि जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की कमाई का मुख्‍य साधन जंगल की लकड़ी व महुआ के फूल हैं. इसी से उनके परिवार की रोटी चलती है. ग्रमीणों ने बताया कि पेट की आग बुझाने के लिए जंगल में आग लगाना उनकी मजबूरी है.

आग पर रोक लगाने में वन विभाग विफल

जंगलों में हर साल लगने वाली आग पर रोक लगाने में वन विभाग पूरी तरह विफल है. विभाग का कहना है कि आग पर रोक लगाने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा. इसके साथ ही महुआ के पेड़ों को संख्याबद्ध किया जाएगा. इससे आग की स्थि‍ति का पता चल सकेगा. अधिकारियों ने बताया कि वन समितियों को जागरुक किया जा रहा है, ताकि जंगल में आग लगने पर तुरंत काबू किया जा सके. Edited by Anand Anal यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=273586&action=edit">यह

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