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धनबाद : सदर अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे, भयभीत रहते हैं मरीज व परिजन

Ravi Chourasia Dhanbad : धनबाद के सदर अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे है. शहर के कोर्ट मोड़ और धनबाद थाना के बीच अवस्थित अस्पताल में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है. रात में अस्पताल पहुंचने वाली प्रसूताओं व उनके परिजनों में जान माल की सुरक्षा को लेकर ख़ौफ़ का माहौल बना रहता है. अस्पताल की  चहारदीवारी टूटी होने के कारण रात के समय कभी भी कोई असामाजिक तत्व आसानी से अस्पताल परिसर में प्रवेश कर किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है. अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा तीन पाली में चलने वाले महज 5 होमगार्ड जवानों के भरोसे है. अस्पताल का सबसे अहम हिस्सा माने जाने वाला प्रसूति विभाग  अस्पताल के पिछले छोर पर है. वहां न तो दिन में जवानों की तैनाती रहती है, न ही रात में. इसके चलते अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज ही नहीं, बल्कि उनके उपचार में लगे डॉक्टर और नर्सेज भी अपने आपको असुरक्षित महसूस करते हैं.

रात में नर्सें भी रहती हैं भयभीत

100 बेड की क्षमता वाले सदर अस्पताल में छह विभाग गायनी, ऑर्थो, सर्जरी, चाइल्ड, डेंटल, जनरल फिजिशियन समेत ओपीडी में कुल 25 डॉक्टर हैं. वहीं, 35 नर्सेस हैं, जो अस्पताल कैम्पस में ही रहती हैं. अस्पताल में सुरक्षा की कमी को लेकर यहां काम करने वाली नर्सेस भी रात में अपने आपको असुरक्षित महसूस करती हैं. यह भी पढ़ें : धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-strategy-made-to-stop-coal-theft-and-illegal-mining/">धनबाद:

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बिना सूचना के घर चले जाते हैं इलाजरत मरीज

सदर अस्पताल के ओपीडी समेत भर्ती मरीजों व उनके परिजनों को मिलाकर प्रतिदिन तकरीबन 400 से 500 लोगों का आना-जाना लगा रहता है. अस्पताल में मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के पास आगंतुकों का कोई लेखा-जोख नहीं रहता है. लचर सुरक्षा व्यवस्था का ही परिणाम है कि इलाज कराने आए रोगी भी कब चले जाते हैं और कब आते हैं इसे देखने वाला कोई नहीं है. कभी-कभी तो रोगी इलाज के क्रम में बिना सूचना के ही चले जाते हैं. लेकिन अस्पताल प्रबंधन का इस पर कोई ध्यान नहीं है.

रात में महिलाएं सुरक्षित नहीं  

शुक्रवार की रात अपनी बेटी का प्रसव कराने सदर अस्पताल पहुंची मालती देवी की मानें तो सदर अस्पताल में महिलाओं को रात बिताना खतरे से खाली नहीं. उन्होंने बताया कि अपनी बेटी के प्रसव को लेकर उन्हें पूरी रात प्रसूति विभाग के बाहर बैठना पड़ा. अस्पताल के सान्नाटे के बीच सुरक्षा कर्मियों के मौजूद नहीं रहने से पूरी रात अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही थी. उन्होंने बताया कि यदि रात में कोई असामाजिक तत्व अस्पताल में घुस कर कोई बड़ी घटना को अंजाम दे दे, तो इसे कोई देखने वाला नहीं है.

सुरक्षा कर्मियों के लिए डीएमएफटी को लिखा गया है : उपाधीक्षक

इस संबंध में पूछे जाने पर सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि अस्पताल में जरूरत के हिसाब से सुरक्षा कर्मियों का अभाव है. इसके लिए डीएमएफटी को लिखा गया है, लेकिन अब तक सुरक्षा कर्मी मुहैया नहीं कराए गए हैं. यह भी पढ़ें : 45">https://lagatar.in/45-year-old-man-misbehaved-with-5-year-old-innocent-condition-critical/">45

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