Dhanbad : धनबाद
(Dhanbad) इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और झारखंड हेल्थ सर्विस एसोसिएशन (झासा) के आह्वान पर बुधवार 1 मार्च को जिले के सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों के चिकित्सक हड़ताल पर रहे. चिकित्सक, मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. इस हड़ताल के कारण जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज अस्पताल का बुरा हाल रहा. ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही. दूर दराज से आये मरीज अस्पताल परिसर में भटकते नजर आये. अस्पताल में भर्ती मरीज भी पारा मेडिकल स्टाफ के भरोसे दिन काटते मिले. हालांकि कार्य बहिष्कार के बाद भी इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया. सदर अस्पताल, निजी क्लीनिक के डॉक्टरों ने भी ओपीडी नहीं लगाई. सिर्फ इमरजेंसी सेवा बहाल रही. सैकड़ों लोगों को बिना इलाज के घर वापस लौटना पड़ा. कुछ लोगों ने मेडिकल स्टोर में उपलब्ध चिकित्सकों से अपना इलाज कराया. झासा के सचिव डॉ. ठाकुर मृत्युंजय कुमार सिंह ने बताया कि चिकित्सकों पर लगातार हमले के खिलाफ आज सांकेतिक हड़ताल की गई है. राज्य के सभी 24 जिलों में प्रत्येक निजी क्लिनिक/नर्सिंग होम और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर सेवाओं का सांकेतिक बहिष्कार कर हमले के खिलाफ नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं. राज्य में 14,000 से अधिक पंजीकृत डॉक्टरों ने नियमित हमले के विरोध में 24 घंटे के लिये सांकेतिक बहिष्कार किया है. चिकित्सकों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि आईएमए और झासा की संयुक्त बैठक आज शाम 6 बजे रांची में होगी, जिसमें भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी.
कतरास श्री कृष्णा मातृ सदन में भी बंद रहा ओपीडी
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श्री कृष्णा मातृ सदन में बंद[/caption]
Katras : )पिछले 15 दिनों में झारखंड में डॉक्टर के साथ मारपीट एवं दुर्व्यवहार के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर बुधवार श्री कृष्णा मातृ सदन कतरास में भी ओपीडी सेवा बंद रही. सिर्फ इमरजेंसी सेवा चालू रही. श्री कृष्णा मातृ सदन की संचालक डॉ शिवानी झा ने कहा कि पूरे भारत के हर राज्य में लगभग मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है. पर झारखंड में अभी तक लागू नहीं है. इस कारण आये दिन हर दिन डॉक्टरों के साथ वारदात होती रहती है. विगत 15 दिन में रांची, गढ़वा, हजारीबाग, जामताड़ा, पेटरवार, लोहरदगा एवं रिम्स के डॉक्टरों के साथ घटी घटना इसका प्रमाण है. झारखंड में भी मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो और यूपी एवं हरियाणा की तर्ज पर 50 बेड के अस्पताल एवं एकल क्लिनिक को क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट से मुक्त किया जाए. [wpse_comments_template]
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