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धनबाद :  ‘बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूं न निकला’

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का, जो चीरा तो इक क़तरा-ए-खूं न निकला. किसी शायर का यह शेर कांग्रेस के बंद कार्यालय, उसे खुलवाने के लिए मची हाय-तौबा, आंदोलन और सरकार के रवैये पर सटीक व्यंग्य की तरह जान पड़ता है. कांग्रेस का धनबाद जिला कार्यालय विगत 12 वर्षों से बंद है. कहा जा रहा था कि पार्टी सरकार में शामिल है और राज्य सरकार चाहे तो कार्यालय का ताला खुल सकता है. एक हद तक यह तर्क सही भी हो सकता है, मगर अब जो तथ्य उजागर हो रहे हैं, उससे पता चलता है कि कार्यालय कांग्रेस की वैध संपत्ति है ही नहीं.

 अदालतों में चला मामला, कांग्रेस की हुई पराजय

जिस जमीन पर कांग्रेस का यह कार्यालय 12 वर्षों से धूल फांक रहा है, वह लोकभूमि के रूप में दर्ज है. कांग्रेस ने उस पर जबरन कब्जा जमा रखा था. विभिन्न अदालतों में यह मामला चला, जहां कांग्रेस की पराजय हुई. विभिन्न न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद उपायुक्त ने अपने आदेश में कहा है कि यह भूखंड लोक भूमि है, जिस पर इन लोगों का अवैध कब्जा है. ज्ञातव्य है कि जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से कार्यालय का ताला खोलने के लिए पिछले एक पखवाड़े से आंदोलन चलाया जा रहा है.

   अंचलाधिकारी व उपायुक्त का आदेश भी विपरीत

जानकारी के अनुसार लुबी सर्कुलर रोड़ स्थित कांग्रेस एवं राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ के कार्यालय को सील करने के जिला परीषद के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ द्वारा दायर अतिक्रमण अपील (जेपीईएल 2/15) को उपायुक्त धनबाद के न्यायालय ने खारिज कर दिया है. 29 मार्च 2011 को प्रशासन के सहयोग से जिला परिषद ने कार्यालय को सील कर दिया था. अंचलाधिकारी धनबाद ने अतिक्रमण वाद संख्या 152/13-14  में सुनवाई के बाद 12 मार्च 23 को आदेश पारित किया कि उपरोक्त भूमि, जिस पर राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ का व कांग्रेस पार्टी का कार्यालय है, एक लोक भूमि है, जिसका अतिक्रमण किया गया है.

     काम न आई रोकोमसं की अपील

अंचलाधिकारी धनबाद के उक्त आदेश को अपील दायर कर उपायुक्त धनबाद के न्यायालय में चुनौती दी गई थी. राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ ने अपील में दलील देते हुए कहा था  कि अंचलाधिकारी ने भूमि का निरीक्षण किए बिना आदेश पारित कर दिया. राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ सामाजिक संगठन है, जो मजदूरों के कल्याण हेतु काम करता है. उस भूमि व वहां बने भवन पर 1970 से उसका दखल कब्जा है.          जिसका उपयोग मजदूर संघ के कार्यालय के रूप में किया जाता है.

  मजदूर संघ ने दी थी दलील

मजदूर संघ ने अपनी दलील में कहा था कि 1973 में भी अतिक्रमणवाद चला था, जिसमें भूमि को बंदोबस्त करने का निर्देश दिया गया था तथा अतिक्रमणवाद की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी. इसलिए उस आदेश के 33 वर्ष बाद फिर से अतिक्रमण वाद चलाने का कोई औचित्य नहीं है. मजदूर संघ ने अपनी दलील में कहा था कि उपरोक्त भवन का वह नगरपालिका टैक्स भी भुगतान करता आ रहा है, जिसका विरोध करते हुए जिला परिषद ने कहा था कि 25 मार्च 14 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश आलोक में अतिक्रमण वाद प्रारंभ किया गया था. मजदूर संघ द्वारा भूमि के संबंध में कोई कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया है.

 गेंद जिला परिषद व सरकार के पाले में

उपरोक्त भूमि लोक भूमि है. दोनों पक्ष को सुनने के बाद धनबाद उपायुक्त ने अपने आदेश में कहा कि उपरोक्त भूमि जिस पर मजदूर संघ अपना कब्जा बता रहा है, वह जिला परिषद धनबाद के नाम से दर्ज है. मजदूर संघ केवल लंबे समय से दखल के आधार पर उस पर अपना दावा कर रहा है. परंतु भू राजस्व कागजात के अवलोकन से पता चलता है कि उक्त भूमि जिला परिषद धनबाद के नाम से दर्ज है, जो लोक भूमि है. भूमि पर प्रतिकूल कब्जा के सिद्धांत पर स्वामित्व का निर्धारण इस न्यायालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत नहीं आता है. इसलिए अंचला धिकारी द्वारा पारित आदेश विधि अनुकूल है. उपायुक्त ने आदेश में कहा है कि चूंकि राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ मजदूरों के कल्याण हेतु गठित श्रमिक संगठन है, जिसका लंबे समय से उस परिसर पर कब्जा रहा है, इस कारण उपरोक्त भवन के लिए बंदोबस्ती,लीज के लिए आवेदन देने हेतु स्वतंत्र है. यदि ऐसा आवेदन जिला परिषद को प्राप्त होता है तो सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं नियमों के आधार पर परिसर आवंटन करने का विचार किया जा सकता है.

  हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दी थी याचिका

गौरतलब है कि राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ ने अंचलाधिकारी धनबाद के आदेश को उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर भी चुनौती दी थी. उच्च न्यायालय ने भी रिट याचिका खारिज कर दी थी तथा डीसी धनबाद को अतिक्रमण अपील पर जल्द सुनवाई का निर्देश दिया था. उपायुक्त ने अपने आदेश में कहा है कि उपरोक्त भूमि लोक भूमि है, जिसपर उनका अवैध कब्जा था. प्रतिकूल न्यायिक आदेश के बाद अब तय हो गया है कि बगैर राज्य सरकार के निर्देश के धनबाद में आरसीएमएस और जिला कांग्रेस कार्यालय का ताला 12 साल से लटका पड़ा हुआ है. कांग्रेस सरकार में शामिल है, और फैसला सरकार को ही लेना है. [wpse_comments_template]

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