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धनबाद:  डीपीएस में वित्तीय अनियमितता पर अब हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

Dhanbad : धनबाद (Dhanbad दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) कार्मिक नगर के प्राचार्य डॉक्टर सरिता सिन्हा एवं बिल्डर अमित कुमार सुलतानिया के बीच आपराधिक मुकदमा अब विद्यालय के जूनियर विंग भवन के निर्माण एवं विद्यालय कोष के घोटाले पर आ टिका है.   झारखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार 20 अप्रैल को इस संबंध में दाखिल पीआईएल को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य सरकार तथा सीबीआई को 22 जून तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

   युवा कांग्रेस नेता अभिजीत राज ने दायर की है याचिका

झारखंड राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष अभिजीत राज ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की थी. याचिका में राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, बीसीसीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर कम चेयरमैन, डायरेक्टर पर्सनल बीसीसीएल, दिल्ली पब्लिक स्कूल कोयला भवन के जनरल मैनेजर, सीबीआई, सीबीआई के डायरेक्टर, दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसायटी के चेयरमैन, दिल्ली पब्लिक स्कूल कार्मिक नगर के प्राचार्य डॉ सरिता सिन्हा, डीपीएस के मैनेजमेंट फाइनेंसियल जीएम बीके पारुई तथा अमित कुमार सुलतानिया को विपक्षी बनाया गया है.

    पहले ठेकेदार ने किया प्रचार्य पर मुकदमा

जनहित याचिका के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए झारखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सिद्धार्थ सुधांशु ने बताया कि डीपीएस में भारी पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया गया है. पहले विद्यालय के जूनियर विंग भवन के निर्माण करने वाले कांट्रेक्टर द्वारा विद्यालय के प्राचार्य पर आपराधिक मुकदमा किया गया, फिर इंजीनियर द्वारा प्राचार्य पर एवं स्कूल बिल्डिंग कमेटी के सदस्यों द्वारा इंजीनियर एवं प्राचार्य पर लगातार अदालत में अपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए.

  फिर प्रचार्य ने ठेकेदार पर किया केस

जवाब में प्राचार्य द्वारा सरायढेला थाना में भवन निर्माण करने वाले कांट्रेक्टर पर मुकदमा दाखिल किया गया. इन सभी आपराधिक मुकदमों की जड़ विद्यालय में वित्तीय अनियमितता बताई गई है. प्राचार्य पर यह भी आरोप लगाया गया है कि विद्यालय के कोष में बच्चों द्वारा लिए गए पैसे को फर्जी बिल के जरिये निकाल लिया गया. कोविड-19 के दौरान विद्यालय में लैपटॉप, मोबाइल, लिफ्ट, दरवाजे, खिड़की का पर्दा तथा सैनिटाइजर के नाम पर विद्यालय कोष का दुरुपयोग कर फर्जी बिल के माध्यम से पैसे की निकासी की गई. साथ ही विद्यालय भवन के निर्माण में टेंडर को लेकर भी नियम का उल्लंघन किया गया. जनहित याचिका में इन तमाम मुद्दों की सीबीआई जांच की मांग की गई है. उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. [wpse_comments_template]

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