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धनबाद : कुछ राज्यों के विरोध के चलते राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई हिंदी- डॉ. सरोज

Dhanbad : पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज, धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-placement-drive-in-sslnt-college-selection-of-250-girl-students/">

(Dhanbad) में 19 सितंबर को शिक्षा उत्थान न्यास परिषद की ओर से विचार गोष्ठी हुई. विषय था विकास में हिंदी भाषा का महत्व और योगदान. विशिष्ट अतिथि बीबीएम कॉलेज बलियापुर के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कुमार सिन्हा ने कहा हिंदी हमारी राजभाषा है. कुछ राज्यों के विरोध के कारण अब तक यह राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है. परंतु धीरे-धीरे इसके बोलने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. एसकेएल दास ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है. स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. परंतु दुर्भाग्य है कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी यह उपेक्षित है. डॉ. मुकुंद रविदास ने कहा कि हिंदी अत्यंत ही सरल, सुगम और वैज्ञानिक भाषा है. जैसा हम बोलते हैं, सुनते हैं वैसा ही हम लिखते भी हैं. हिंदी विश्व की तीसरी भाषा बन चुकी है. यह न केवल बोलचाल की भाषा है, बल्कि इसमें रोजगार भी उपलब्ध हो रहे हैं. कार्यक्रम में स्नातकोत्तर छात्रा प्रिया कुमारी, मोना कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, सपना कुमारी, किरण कुमारी, खुशबू कुमारी व अन्य छात्राएं उपस्थित रहीं. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-another-chance-to-enroll-in-inter-arts-in-sslnt/">धनबाद

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