Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) होली और होलिका दहन को लेकर लोगों के बीच संशय बना हुआ है. पंडित सुधीर कुमार का कहना है कि प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को रंगभरी या आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है. रंगभरी एकादशी के दिन काशीवासी अबीर गुलाल उड़ाते हैं और काशी विश्वनाथ की पूजा-अर्चना अबीर गुलाल से करते हैं. मान्यता है कि इसी दिन माता गौरी का द्विरागमन (गौना) कराकर भगवान शिव माता पार्वती को काशी लेकर आए थे. फाल्गुन पूर्णिमा को प्रत्येक वर्ष होलिका दहन मनाने की परंपरा है. पौराणिक मान्यता के अनुसार हिरण्यकशिपु की बहन होलिका द्वेषवश प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर प्रज्ज्वलित अग्नि में बैठ गई थी. ईश्वरेच्छा से होलिका जल गई और विष्णु भक्त प्रह्लाद बच गए. तब से अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में होलिका दहन परंपरा चल पड़ी, जो अब भी जीवित है. इस वर्ष होलिका दहन 6 मार्च को है. होलिका दहन भद्रापुच्छ की वेला में किया जाता है. भद्रा पुच्छ मध्यरात्रि के 12.23 बजे से रात 1.35 बजे तक है. इसीलिए इसी समय होलिका दहन होगा. नियमत: एक दिन चिता की शांति का समय है. इसलिए रंग अबीर गुलाल 8 मार्च को उड़ाया जाएगा और भाईचारे का पर्व होली मनाया जाएगा. [wpse_comments_template]
धनबाद: होलिका दहन 6 मार्च की मध्यरात्रि, रंगोत्सव होली 8 को
Last Updated: Mar 06, 2023 12:00 AM (IST)