Ravi chourasia Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) योजनाएं सरकार की, समस्या आम जनता की. योजनाएं बन तो जाती हैं, मगर आम जनता को उसका लाभ कब और कैसे मिलेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं होता. कुछ योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती हैं तो कुछ वर्षों लंबित रहने के कारण काम लायक ही नहीं रहती. खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है. पहले दबाव डाल कर योजनाएं बनाने पर विवश करो, फिर उनके पूरा होने की आस लगाए बैठे रहो. धनबाद की जलापूर्ति योजनाओं पर तो मानो ग्रहण लगा हुआ है. लोग प्यास बुझाने की आस लगाए बैठे हैं, जबकि सरकार की जलापूर्ति योजना करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद धरातल पर उतर ही नहीं रही. सारी योजनाएं शिव की जटा में फंसी गंगा की तरह जमीन तलाश रही हैं. पता नहीं यह तलाश कब पूरी होगी.
टेंडर के खेल में फंस गया काम
निरसा गोविंदपुर मेगा जलापूर्ति योजना का काम टेंडर के खेल में फंस गया है. वर्ष 2016 में इजराइल की टहल कंपनी को काम दिया गया था. इस जलापूर्ति योजना के तहत जिले के 475 गांवों में 2019 तक पानी पहुंचाना था. मगर काम समय पर पूरा नहीं होने तथा लगातार चेतावनी देने के बाद भी कंपनी के काम में सुधार नहीं होने के कारण 5 माह पूर्व जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट ( डीएमएफटी ) न्याय परिषद के द्वार टहल कंपनी को टर्मिनेट कर दिया गया. तब से अब तक मेगा जलापूर्ति योजना पर विराम लगा हुआ है. निरसा व गोविंदपुर के लाखों लोगों को 2019 तक पानी देने की योजना धरी की धरी रह गई है. बजट बढ़ा, मगर कंपनी लापरवाह
जानकारी देते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग 2 के कार्यपालक अभियंता भीख राम भगत ने बताया कि निरसा गोविंदपुर मेगा जलापूर्ति योजना की राशि 274 करोड बढ़ा दी गई है. विभाग ने 300 करोड़ का बजट रांची भेजा था, जिसमें नॉर्थ जलापूर्ति योजना के लिए 616 करोड़ और साउथ के लिए 325 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया गया था. पहले नार्थ में 434 करोड़ और साउथ में 233 करोड़ का बजट था. अब उसे बढ़ाकर कुल 941 करोड कर दिया गया है, जिससे 475 गांवों में कुल 80 हज़ार कनेक्शन लोगों के घरों में देना था. परंतु टहल कंपनी की लापरवाही के कारण यह कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका. अधिकारियों ने बार-बार उन्हें वार्निंग भी दी. बावजूद तय समय पर मात्र 50 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका. इस कारण डीएमएफटी की ओर से टहल कंपनी को टर्मिनेट कर दिया गया है. इस बीच टहल कंपनी को लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है. अब निकलेगा 791 करोड़ का टेंडर
आगे उन्होंने कहा कि मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद दोबारा 791 करोड़ का टेंडर निकाला जाएगा. 5 वर्ष पूर्व जिस रेट पर टेंडर डाला गया था, उसे अभी के रेट को देखते हुए बढ़ाया जाएगा.
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