Nirsa: निरसा (Nirsa) धनबाद-आसनसोल के बीच निरसा में जीटी रोड के जाम की समस्या निरसावासियों के लिए नासूर बन गई है. एनएचएआई की ओर से सड़कों के चौड़ीकरण का काम चलने के कारण विगत एक सप्ताह से यह समस्या निरंतर गहराती जा रही है. प्रशासनिक अधिकारियों को जाम से होने वाली परेशानियों से कोई मतलब नहीं है. प्रतिदिन चार-पांच घंटा जाम आम बात हो गयी है
दोनों ओर सर्विस लेन में फुटपाथ दुकानदारों का कब्जा
बताया जाता है कि जाम लगने का प्रमुख कारण निरसा थाना से सिनेमा हॉल मोड़ तक दोनों ओर सर्विस लेन में फुटपाथ दुकानदारों का कब्जा होना है. इतना ही नहीं, निरसा गुरुद्वारा से निरसा हटिया मोड़ चौक तक मुख्य सड़क पर तीन व चार पहिया वाहन खड़ा कर देने से जाम की स्थिति बनी रहती है. प्रखंड स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी किस मर्ज की दवा हैं, लोगों को समझ नहीं आता. राष्ट्रीय उच्च पथ के दोनों सर्विस लेन को कब्जा जमाए फुटपाथ दुकानदारों से मुक्त नहीं कराया जा सका है. चार माह गुजर गए, अंचलाधिकारी दुकानदारों को अन्यत्र बसाने की बात तो दूर, अभी तक जमीन चिह्नित नहीं कर पाये. ट्रैफिक कंट्रोल की मुकम्मल व्यवस्था नहीं
सीओ नितिन शिवम गुप्ता का कहना है कि जाम हटाने व ट्रैफिक कंट्रोल के लिए निरसा पुलिस को कई बार कहा जा चुका है. यह जबाबदेही उनकी है, मेरी नहीं. यह कहकर उन्होंने अपना पल्ला झाड लिया. बतातें चलें कि गुरुवार को मुख्य सड़क पर लगे भीषण जाम में फंसे लोगों का आक्रोश सातवें आसमान पर दिखा. जबकि जाम में बड़े-बड़े वाहन की बात तो दूर, स्कूटर व बाइक भी घंटों तक फंसी रही और कोई कुछ नहीं कर सका. हालांकि यह समस्या पहली बार नहीं हुई है. थाना से महज कुछ ही दूरी पर हमेशा जाम की समस्या बनी रहती है, . लोगों को मिनटों के सफर में घंटों लग जाते हैं. स्थानीय लोगों ने कहा कि मुख्य सड़क पर रुक-रुककर जाम से लोग पूरे दिन जूझते रहते हैं. मिनटों का सफर घंटों में तय करने को लोग मजबूर हो रहे हैं. प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं होने से सड़क पर जबरदस्ती नाश्ता, सब्जी आदि की दुकान सज रही है. दुकान के निकट लोग अपने दो पहिया वाहनों को खड़ा कर घंटों तक फरार हो जाते हैं. जनप्रतिधियों की चुप्पी से लोगों में उबाल
जाम के मामले में स्थानीय जनप्रतिनधियों की चुप्पी से लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. लोगों की मानें तो नेता को सिर्फ वोट चाहिए, जनता की समस्याओं से उन्हें कोई लेना देना नहीं है. जब दुर्घटना पर किसी की मौत हो जाती है तो घड़ियाली आंसू बहाने के लिए जनप्रतिनिधि सड़क पर उतर जाते हैं. ऐसे जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने की जरूरत आन पड़ी है. [wpse_comments_template]
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