Niraj Kumar Dhanbad : ह्यूमन एक्टिविटीज यानी मानवीय क्रियाकलाप प्रकृति को हानि पहुंचा रहे हैं. यह जैव विविधता को भी क्षति पहुंचा रही है. हालांकि कई जीव विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं. किसी जीव के विलुप्त होने का प्रभाव प्राकृतिक संतुलन पर पड़ता है. पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ने से जैव श्रृंखला प्रभावित होती है. जैव-श्रृंखला में शामिल होने की वजह से इसका प्रभाव इंसानों पर भी पड़ता है.
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alt="" width="300" height="167" /> मोलस्क समूह के जीव[/caption] धनबाद जिले के हीरापुर निवासी वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी ने बताया कि पहली जैव प्रजाति की खोज उन्होंने बर्ष 1991 में की थी. विगत तीन दशक में उन्होंने समुद्री जीवन पर रिसर्च कर 137 से अधिक नई प्रजाति के जीव की खोज की है. लेकिन पहली बार वह एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय शोध का हिस्सा बने हैं, जिसमें पाया कि घोंघा समूह के जीव `मोलस्क` प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है. यह रिसर्च पोलैंड के वैज्ञानिकों के साथ की गई है. रिसर्च पेपर स्वीटजरलैंड के प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय जनरल वाटर में प्रकाशित हो चुका है. रिसर्च टीम में उनके साथ पोलैंड के 11 वैज्ञानिकों के साथ मोंटेनेग्रो का एक वैज्ञानिक शामिल था.
32 वर्षों में पहली बार विलुप्त होती प्रजाति पर रिसर्च
[caption id="attachment_657599" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="167" /> मोलस्क समूह के जीव[/caption] धनबाद जिले के हीरापुर निवासी वैज्ञानिक डॉ तापस चटर्जी ने बताया कि पहली जैव प्रजाति की खोज उन्होंने बर्ष 1991 में की थी. विगत तीन दशक में उन्होंने समुद्री जीवन पर रिसर्च कर 137 से अधिक नई प्रजाति के जीव की खोज की है. लेकिन पहली बार वह एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय शोध का हिस्सा बने हैं, जिसमें पाया कि घोंघा समूह के जीव `मोलस्क` प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है. यह रिसर्च पोलैंड के वैज्ञानिकों के साथ की गई है. रिसर्च पेपर स्वीटजरलैंड के प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय जनरल वाटर में प्रकाशित हो चुका है. रिसर्च टीम में उनके साथ पोलैंड के 11 वैज्ञानिकों के साथ मोंटेनेग्रो का एक वैज्ञानिक शामिल था.
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