धनबाद: भगवान को सच्चे मन से याद करें तो रक्षा करने स्वयं दौड़े आते हैं: यति किशोरी जी
Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) धनसार स्थित होटल सिद्धि विनायक में गुरुवार 13 अप्रैल को सुरभि संस्था द्वारा तीन दिवसीय धार्मिक कथा "नानी बाई रो मायरो" का शुभारंभ किया गया. कथा के पहले दिन भक्त और भगवान की कथा सुनने श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे. इस अवसर पर मुम्बई से आई कथा वाचक यति किशोरी जी तथा कोलकाता से आये श्याम अग्रवाल की टीम ने संगीतमय कथा के साथ आश्यर्य जनक झांकियां प्रस्तुत की. कथा के पहले दिन यति किशोरी जी ने कहा कि नानी बाई रो मायरो अटूट श्रद्धा पर आधारित प्रेरणादायी कथा है, जहां भगवान श्रीकृष्ण का गुणगान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भगवान को यदि सच्चे मन से याद किया जाए तो वह भक्तों की रक्षा करने स्वयं आते हैं. कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि नानी बाई रो मायरो की शुरूआत नरसी भगत के जीवन से हुई. उन्होंने बताया कि नरसी जन्म से ही गूंगे-बहरे थे. वह अपनी दादी के पास रहते थे. उनकी एक भाई-भाभी भी थी. भाभी का स्वभाव कड़क था. एक संत की कृपा से नरसी की आवाज आ गई तथा उनका बहरापन भी ठीक हो गया. नरसी के माता-पिता महामारी के शिकार हो गए. नरसी का विवाह हुआ लेकिन पत्नी छोटी उम्र में भगवान को प्यारी हो गई. दूसरा विवाह कराया गया. समय बीतने पर नरसी की लड़की नानीबाई का विवाह हुआ. इधर नरसी की भाभी ने उन्हें घर से निकाल दिया. नरसी श्रीकृष्ण के अटूट भक्त थे. वह उन्हीं की भक्ति में लग गए. उधर नानीबाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लायक हो गई ¨किंतु नरसी को कोई खबर नहीं थी. लड़की के विवाह पर ननिहाल की तरफ से भात भरने की रस्म के चलते नरसी को सूचित किया गया. उनके पास देने को कुछ नहीं था. उसने भाई-बंधु से मदद की गुहार लगाई. मदद तो दूर, कोई भी चलने तक को तैयार नहीं हुआ. अंत में टूटी-फूटी बैलगाड़ी लेकर नरसी खुद ही लड़की के ससुराल के लिए निकल पड़े. उससे पहले ही भगवान कृष्ण ने उनका घर जेवर व कपड़े से भर दिया, जो सच्चे भक्तों पर भगवान की असीम कृपा को दर्शाता है. [wpse_comments_template]

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