टीम में यह थे शामिल
आईआईटी-आईएसएम के टीम में डिपार्टमेंट ऑफ़ अप्लाइड जियोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मृणाल कांति मुखर्जी, और पीएचडी के विद्यार्थी अनिल कुमार गुप्ता शामिल थे. उन्होंने रॉक माइक्रोस्ट्रक्चरल पैरामीटर, एकीकृत दलालों की पहचान, भू यांत्रिक ढलान से संबंधित स्थिरता चार्ट से सम्बन्धित विषयों पर अध्ययन किया. प्रो मुखर्जी ने बताया कि इन क्षेत्रों के अध्ययन में उन्होंने पाया कि राजमार्ग के किनारे के स्थान भू-स्खलन और सड़क कट ढलान से आने वाली समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इन समस्याओं में छोटी ब्लॉक वाली स्लाइड, टॉपपल्स, पच्चर स्लाइड और बड़े उथले चट्टान शामिल हैं. इनकी वजह से हाइवे का निर्माण और रखरखाव चुनौतीपूर्ण है. कहा कि अब उनका लक्ष्य इन ढलानों पर होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने का है, जिससे राजमार्ग की सुरक्षा बनाए रखने एवं इस पर चलने वाले लोग एहतियात के तौर पर काम कर सकें. यह भी पढ़ें: देवघर:">https://lagatar.in/deoghar-gas-cylinder-caught-fire-husband-wife-and-children-scorched/">देवघर:गैस सिलेंडर में आग लगी, पति-पत्नी और बच्चे झुलसे [wpse_comments_template]

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