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धनबाद:भौतिक संसार में गुरु और शिष्य का संबंध सर्वोत्तम : आशुतोष महाराज

Dhanbad: धनबाद (Dhanbad) स्वामी सहजानंद सेवा ट्रस्ट में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा गुरु पूर्णिमा महोत्सव में भक्तों ने भजन और कथा का आनंद लिया. इस अवसर पर दिव्य गुरु सर्व श्री आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री अमृता भारती ने गुरु महिमा समझाते हुए कहा कि इस भौतिक संसार में गुरु और शिष्य का संबंध सर्वोत्तम है. यह भारतीय संस्कृति की परंपरा रही है कि हम कोई भी कार्य का प्रारंभ गुरु पूजा से करते हैं. गुरु पूजा शिष्य के समर्पण का पर्व है.

  गौरवशाली इतिहास पर रखें ध्यान

कहा कि हम अपने गौरवशाली इतिहास को देखें तो जब जब हमारे समाज का नेतृत्व गुरु सत्ता द्वारा हुआ, समाज ने राम राज्य को साकार पाया है. स्वयं श्री राम के जीवन से हम सीख लेते हैं. उन्होंने प्रत्येक कार्य गुरु आज्ञा से की है. चन्द्रगुप्त ने अखंड राज्य की स्थापना की. उनके जीवन में चाणक्य जैसे सद्गुरु थे. अर्जुन के लिए महाभारत का युद्ध जीतना असंभव था, परंतु उन्होंने खुद को कृष्ण को सौंप दिया.

समर्पण भाव के कारण भगवान को सबसे प्रिय बांसुरी

यूं तो भगवान को सुदामा, अर्जुन, राधा आदि सब प्रिय हैं. परंतु भगवान को सबसे ज्यादा बांसुरी पसंद है. बांसुरी का समर्पण श्रेष्ठ व पूर्ण था. भगवान राम के भी अनेक भक्तों में हनुमान ही सर्वोत्तम भक्त हुए. कारण उन्होंने खुद को ईश्वर के हाथ का खिलौना बना डाला. आज हमें भी पूर्ण समर्पण की आवश्यकता है. गुरु पर्व की हार्दिक शुभकामना देते हुए स्वामी कुन्दनानन्द ने कहा कि आज हमारा समाज गुरु की प्रासंगिकता पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है.  मानव भौतिकवाद की ओर बढ़ रहा है, जो समाज की नैतिकता के पतन का कारण है. जीवन का व्यवहार, अनुशासन, प्रेम भौतिक विज्ञान नहीं दे सकता है. इसकी कमी ही पाशविकता की ओर ले जाती है. इसलिए पाशविकता से अलग होना है. श्रेष्ठ जीवन जीना है एवं आनंद की अनुभूति करना है तो धर्म के सहारे जाना होगा यानि संत सद्गुरु की शरण जाना होगा. स्वामी धनजयानंद के दिशा निर्देश में मंच पर आसीन सुनीति भारती, पुष्पा भारती एवं चंदन के द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया. अंत में ज्ञान दीक्षा का कार्यक्रम आयोजन किया गया. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/approval-of-4-new-atal-mohalla-clinics-in-dhanbad-district/">धनबाद

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