Dhanbad: धनबाद (Dhanbad) झमाडा के मुख्य द्वार पर नियोजन की मांग को लेकर आश्रितों के अनिश्चितकालीन धरना के 78 दिन पूरे हो चुके हैं. प्रबंधन ने भी चुप्पी साध रखी है. इधर धरना पर बैठे आश्रितों के भोजन पर भी आफत आ गई है. कुछ दिन पहले तक झमाडा के मुख्य द्वार पर तंबू में आश्रित आपसी सहयोग से तीन वक्त का भोजन जुटा लेते थे. परंतु 78 दिनों में उनकी शारीरिक-मानसिक क्षमता के साथ आर्थिक स्थिति भी बिगड़ी है. आश्रितों का कहना है कि रात में कभी-कभी सिर्फ पानी पीकर सोना पड़ रहा है.
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जमा पूंजी हो गई खत्म, अब धरना पर बैठना मुश्किल
मेहराबुल अंसारी ने बताया कि अब धरना पर बैठना मुश्किल हो रहा है. अब तो हमारे पास खाने को भी पैसे नहीं बचे हैं. जमा पूंजी भी खत्म हो चली है. उन्होंने बताया कि धरना पर 35 से 40 लोग बैठे हुए हैं. सभी आपसी सहयोग से भोजन की व्यवस्था करते आ रहे हैं. लेकिन अब आर्थिक स्थिति चरमरा रही है तो किसी दिन दोनों शाम तो किसी दिन सिर्फ दोपहर का भोजन बन रहा है.प्राइवेट नौकरी छूट गई, जैसे-तैसे हो रहा गुजारा
एक अन्य धरनार्थी अरविंद हाड़ी की प्राइवेट नौकरी भी छूट गई है. जो जमा पूंजी थी, उससे घर के लोगों का खर्च चल रहा है. उसी में कुछ धरना स्थल पर भी खर्च कर रहे थे. वह कहते हैं कि अब स्थिति दयनीय होती जा रही है. धरने पर बैठे तमाम आश्रितों को दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ रहे हैं. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-before-the-arrival-of-gangster-faheem-prince-khan-threatened-wont-leave-lalas-killer/">धनबाद: गैंगस्टर फहीम के आने के पहले प्रिंस खान ने दी धमकी-‘लाला के हत्यारे को छोड़ेंगे नहीं’ [wpse_comments_template]
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