पेट की आग बुझाने के लिए मांज रही है जूठे बर्तन
[caption id="attachment_551841" align="aligncenter" width="247"]alt="" width="247" height="300" /> चंपा देवी[/caption] केन्दुआ थाना छेत्र के गंसाडीह 3 नंबर निवासी चंपा देवी घर में अकेली है. पति मन्टुलाल बेगीझमाडा कर्मी थे. लंबी बीमारी के बाद उनका देहांत वर्ष 2013 में हो गया. तब से वह अपना पेट भरने के लिए दूसरों के घरों का जूठन मांज रही है. चंपा बताती है कि उनके पति को दमा की बीमारी थी. विभाग से समय पर पैसा न मिला तो इलाज भी ठीक से नहीं करा सकी और एक दिन दुनिया से चले गए. वह अकेली रह गयी. पिछले 10 वर्षों से दूसरों के घरों में जूठे बर्तन मांज कर गुजर बसर कर रही है.
पिता की मौत के बाद असहाय हो गया 10 वर्षीय शुभम
[caption id="attachment_551842" align="aligncenter" width="246"]alt="" width="246" height="300" /> भानु देवी[/caption] राजगंज की भानु देवी बताती हैं कि उनके पति चारकु हाड़ी की मृत्यु वर्ष 2010 में बीमारी से हो गयी. तब से परिवार पर मानो कहर टूट पड़ा. कुछ दिन घर की जमा पूंजी से खर्च चला. बाद में परिवार के 6 सदस्यों का भार उसके 10 वर्षीय बेटे के कंधे पर आ गया. शुभम पास के प्राइवेट स्कूल में झाड़ू व साफ सफाई का काम करता है. काम के बदले जो पैसे मिलते हैं, उससे बमुश्किल परिवार के सदस्यों का पेट भरता है. वह बताती हैं स्थिति ज्यादा खराबब होने पर वह खुद आस पड़ोस के घरों में साफ सफाई करने निकल जाती है.
कैसे भरें विकलांग बेटी समेत आठ सदस्यों का पेट
[caption id="attachment_551843" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="236" /> दुलारी देवी[/caption] धनबाद थाना क्षेत्र के धैया कोरंगा बस्ती निवासी दुलारी देवी के पति की मौत के बाद विकलांग बेटी समेत परिवार के 8 सदस्यों का पेट पाल रही है. वह बताती हैं कि पति अजीत कोरंगा की मृत्यु 15 वर्ष पूर्व कैंसर से हो गई. पैसे के अभाव में इलाज भी नहीं करा सकी. उनके घर में कुल 8 सदस्य हैं, जिसमें एक 16 वर्षीय विकलांग बेटी भी है. सभी को पालने के लिए वह पिछले 15 वर्षों से आस-पड़ोस के घरों में चौका बर्तन का काम करती आ रही है. [wpse_comments_template]

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