Ravi chourasia Dhanbad : झमाडा प्रबंधन के खिलाफ अनुकंपा बहाली की मांग को लेकर आश्रित पिछले 23 दिनों से धरना दे रहे हैं. धरना अभी जारी रहेगा. दो दिन के बाद होली है, लेकिन आश्रितों ने त्योहार नहीं मनाने का निश्चय कर लिया है. आश्रित अरबिंद हाड़ी ने कहा कि होली के दिन भी वे धरना स्थल पर मौजूद रहेंगे. उन्होंने कहा है कि होली नहीं मनाएंगे और मनाएं भी कैसे, हमारे पास तो दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं.
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क्या कहते हैं धरना पर बैठे आश्रित
प्रबंधन के खिलाफ पिछले 23 दिनों से धरना दे रहे आश्रितों में कुल 56 लोग शामिल हैं. कई आश्रितों के घर में रोटी नहीं बची, तो कई परिवार सरकारी अनाज पर जिंदा है. अरबिंद कुमार हाड़ी बताते हैं कि उनके परिवार में 12 सदस्य हैं. कमाने वाला सिर्फ वह हैं. वह परिवार के भरन पोषण के लिए दैनिक मजदूरी करते थे. फिलहाल 23 दिनों से धरना पर बैठे रहने से घर का खर्च भी नहीं चल रहा है, तो होली कैसे मनाएंगे.बिहार से आ धमके, अब गुजर-बसर भी मुश्किल
नागेंद्र मिश्रा अनुकंपा पर बहाली की बात सुनकर बिहार के बक्सर से धनबाद पहुंच गए हैं. उनका कहना है कि वर्ष 2013 में पिता का स्वर्गवास हो गया था. इसके बाद बहुत दिनों तक नौकरी नहीं मिलने के कारण भुखमरी के कगार पर पहुंच गए थे. बक्सर स्थित गांव में खेती-बाड़ी कर किसी तरह परिवार का पेट पाल रहा था. अब पिछले 23 दिनों से धरना पर हैं और होली में भी यहीं रहेंगे.सरकारी अनाज का सहारा, होली का क्या करें
महेंद्र राम के परिवार में कुल 7 लोग हैं, लेकिन कमाने वाला वह अकेले हैं. वह बताते हैं कि सरकारी अनाज से परिवार का भरन पोषण किसी तरह चल रहा है. कई दिनों तक सिर्फ माड़ और चावल खाने की नौबत आ जाती है. सब्जी खरीदने के पैसे नहीं रहते हैं. यह होली हमारे लिए नहीं, बल्कि बड़े बाबू के लिए है.दैनिक मजदूरी करते थे, वह भी गई
धीरेंद्र राम कहते हैं कि उनके परिवार में कुल 7 लोग हैं और घर का खर्च दैनिक मजदूरी से चलता है. लेकिन प्रबंधन के खिलाफ पिछले 23 दिनों से घर, परिवार छोड़ कर इस धरना में शामिल हैं. अब तो घर का खर्च भी चलाना मुश्किल हो गया है तो होली मनाने की कैसे सोच सकते हैं.मजदूरी मिली नहीं, बीमार मां का इलाज भी मुश्किल
विक्की कुमार राउत कहते हैं कि उनके परिवार में 17 लोग हैं और फिलहाल मां की तबीयत खराब है. कमाने वाला वह और बड़ा भाई है, जो ऑटो चला कर घर चला रहा है. पिछले 23 दिनों से मजदूरी भी नहीं मिली है. मां का इलाज भी कराना है और पैसे की भारी किल्लत है. इसलिए इस वर्ष हम होली नहीं मना सकते .कमाई गई और आ गई होली, क्या करें
प्रेमचंद कुमार कहते हैं कि होली के लिए पैसे की जरूरत है. परिवार में कुल 6 सदस्य हैं. वह दो भाई हैं. बड़ा भाई प्राइवेट जॉब करता था. किसी कारणवश काम छूट गया है. अब इन 6 लोगों का भरन पोषण करना काफी मुश्किल हो गया है. धरना पर बैठे हैं तो कमाई तो गई और आ गई होली. कहां से मनाएं Edited by Anand Anal यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-everything-should-be-done-on-time-in-matriculation-intermediate-examination-be-careful/">धनबाद: मैट्रिक-इंटरमीडिएट परीक्षा में समय पर हो हर काम, रहें सावधान [wpse_comments_template]
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