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धनबाद : पूरे झारखंड सहित बिहार और बंगाल में मशहूर है झरिया का तिलकुट

Jharia : हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार मकर संक्रांति में अभी 10 दिन शेष हैं. इससे एक दिन पहले 13 जनवरी को पंजाबी लोहड़ी मनाएंगे. पर्व क तैयारी शुरू हो गई है. झरिया का तिलकुट बाजार गुलजार हो गया है. दुकानों में कारीगर पूरे दिन तिलकुट और तिल के लड्डू तैयार करने में जुटे हैं. मकर संक्रांति के दिन माल कम न पड़ जाए, इसलिए पर्याप्त स्टॉक तैयार किया जा रहा है. लोगों ने खरीदारी भी शुरू कर दी है. तिलकुट की सोंधी महक वातावरण में मिठास घोल रही है. झरिया का तिलकुट पूरे झारखंड सहित बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रसिद्ध है. वैसे तो यहां के बाजारों में सालभर तिलकुट की ब्रिकी होती है, लेकिन जाड़े के मौसम में मांग बढ़ जाती है. दिसंबर का दूसरा पखवाड़ा शुरू होते हैं झरिया बाजार और आसपास के घरों में धम-धम की आवाज गूंजने लगती है. यह किसी फैक्ट्री या मशीनों की आवाज नहीं बल्कि हाथ से तिलकुट कूटने की आवाज होती है. तिलकुट को मकर संक्रांति का प्रमुख मिष्ठान माना गया है. इस दिन तिलकुट खाने का धार्मिक महत्व है.

गांधी रोड बाजार, गोलघर गली में सज गईं दुकानें

झरिया शहर का मुख्य बाजार गांधी रोड, गोलघर गली व मेन रोड में तिलकुट की दुकानें सज गई हैं. लोग अभी से ही तिलकुट की खरीदारी करने लगे हैं. वैसे तो झरिया शहर में तिलकुट कई जगहों पर बनाया जाता है, लेकिन दुर्गा ब्रांड तिलकुट यहां पसंद किया जाता है. यहां तैयार तिलकुट की झारखंड समेत बिहार और बंगाल के प्रमुख शहरों में सप्लाई होती है. दुर्गा ब्रांड तिलकुट के कारोबारी रंजीत गुप्ता बताते हैं कि वह पिछले 50 वर्षों से तिलकूट बनाने का कार्य कर रहे हैं. माल तैयार करने का काम नवंबर से शुरू हो जाता है. यह भी पढ़ें : धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-congress-will-agitate-if-the-water-problem-in-jharia-is-not-resolved/">धनबाद:

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बिहार के 20-25 कारीगर तैयार कर रहे तिलकुट

रंजीत गुप्ता ने बताया कि मकर संक्रांति को देखते हुए माल तैयार करने के लिए वह हर साल बिहार के गया से कारीगरों को बुलाते हैं. इस बार 20 से 25 कारीगर सुबह से रात तक रोजाना करीब 10 घंटे तिलकूट बनाने के कार्य पर लगे हुए हैं. प्रतिदिन 200 से 250 किलो तिलकूट तैयार हो रहा है. चीनी, गुड़, ड्राई फ्रूट्स व खोवा समेत अन्य तरह के तिलकूट की डिमांड व्यपारियों द्वारा की जाती है. इस बार शुगर फ्री तिलकुट व गुड़ से बने तिलकूट की ज्यादा डिमांड है. खोवा व सफेद तिल व गुड़ के तिलकुट व गजक ज्यादा पसंद किया जा रहा है. शुगर फ्री तिलकुट की खासियत यह है कि इसे चीनी की अपेक्षा तिल को ज्यादा मात्रा में मिलाकर तैयार किया जाता है. यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है. तिलकुट खाने से कब्जियत की शिकायत दूर होती है.

240 से 410 रुपए किलो है कीमत

तिलकुट बनाने में काफी मेहनत लगती है. गुड़ या चीनी की चासनी बनाकर उसे कूट कर तिलकुट तैयार किया जाता था. तिल को बड़े पात्रों से भुनकर चासनी के ठंढे टुकडों के साथ मिलाकर खूब कूटा जाता है. बजार में इस बार गुड़ से बना तिलकुट 250 से 260 रुपए प्रति किलो, चीनी का तिलकुट 240 से 250 रुपए प्रति किलो, जबकि ड्राई फ्रूट्स व शुगर फ्री तिलकुट की कीमत 400 से 410 रुपए प्रति किलो है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-b-ed-m-ed-and-ma-in-education-examinations-now-from-january-16/">धनबाद

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