Dhanbad: धनबाद (Dhanbad) जोडफाटक में सप्त दिवसीय श्रीमद भागवत कथा बुधवार 3 अगस्त को 31 भव्य मंगल कलश यात्रा के साथ शुरू हो गई. महिलाओं ने अपने सिर पर कलश सजाकर नाचते गाते हुए नगर परिक्रमा की. कलश पूजन के बाद मंदिर से यात्रा धनबाद के मटकुरिया से शक्ति मंदिर कथा स्थल पहुंची. परिक्रमा के दौरान मुख्य यजमान सिर पर कलश रखकर साथ चल रहे थे. श्रद्धालु हरि कीर्तन करते हुए कलश यात्रा के पीछे-पीछे चल रहे थे. यात्रा में सभी भक्तजन नाचते गाते हुए भगवान के भजनों पर आनंद लेते हुए शामिल हुए. राधे कृष्ण के जयकारों से पूरा धनबाद गुंजायमान हो गया.
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alt="" width="300" height="199" /> कलशयात्रा में शामिल मुख्य यजमान और महिलाएं[/caption] शक्ति मंदिर परिसर में पटवारी परिवार द्वारा आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत के प्रथम दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का अलौकिक महत्व बताते हुए कथा व्यास परमपूज्या कृष्णप्रिया जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कोई साधारण ग्रन्थ नहीं है. इसमें साक्षात भगवान कृष्ण का वास है. इसके श्रवण मात्र से जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और प्रभु की मीठी मीठी लीलाओं से प्रेम जागृत होता है. कलियुग में भागवत कथा को वैतरणी कहा गया है. जहां कहीं भी भागवत कथा होती है, वहां अवश्य सुनने के लिए जाना चाहिए.कहा कि भगवान के पास भक्तों की भी डायरी रहती है. उस डायरी से भगवान अपने भक्तों पर नजर रखते हैं.
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भगवान के पास रहती है भक्तों की डायरी
[caption id="attachment_378522" align="aligncenter" width="300"]alt="" width="300" height="199" /> कलशयात्रा में शामिल मुख्य यजमान और महिलाएं[/caption] शक्ति मंदिर परिसर में पटवारी परिवार द्वारा आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत के प्रथम दिवस पर श्रीमद्भागवत कथा का अलौकिक महत्व बताते हुए कथा व्यास परमपूज्या कृष्णप्रिया जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कोई साधारण ग्रन्थ नहीं है. इसमें साक्षात भगवान कृष्ण का वास है. इसके श्रवण मात्र से जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और प्रभु की मीठी मीठी लीलाओं से प्रेम जागृत होता है. कलियुग में भागवत कथा को वैतरणी कहा गया है. जहां कहीं भी भागवत कथा होती है, वहां अवश्य सुनने के लिए जाना चाहिए.कहा कि भगवान के पास भक्तों की भी डायरी रहती है. उस डायरी से भगवान अपने भक्तों पर नजर रखते हैं.
जीवन में नारायण और मृत्यु को मत भूलना
उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा व श्रीभगवद्गीता में अंतर बताते हुए कहा कि भगवद्गीता और भागवत पुराण में बहुत अंतर है. समानता यह है कि दोनों के ही नायक श्रीकृष्ण हैं. वहीं भगवद्गीता में 18 अध्याय होते हैं और लगभग 700 श्लोक हैं. यह हमारे सभी संदेहों को दूर कर आत्मतत्व का ज्ञान कराती है. गांगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं, जो श्री कृष्ण के पैरों से निकली है, जबकि भगवद्गीता श्रीकृष्ण के मुख से निकली है. इसलिए गीता को जीवन मे अवश्य पढ़ना चाहिए. कहा कि जीवन में दो चीज को मत भूलना, एक नारायण और दूसरा मृत्यु. दोनों को भूलोगे तो हमेशा ठोकर खाओगे.भक्ति से मिलती है मानसिक शांति
उन्होंने कहा कि जब भगवान के अलावा अन्य किसी व्यक्ति या वस्तु की अपेक्षा करते हैं तो वह हमारे दुख का कारण बनती है. आज के समय मे हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि ईश्वर के लिए समय ही नहीं निकालते. इसीलिए हमारे अंतर्मन में व्याप्त परमात्मा से नहीं जुड़ पाते. जीवन में भक्ति अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि यह मानसिक शांति के साथ ईश्वर की कृपा देने वाली है. कहा धर्म और संप्रदाय अलग अलग बन सकता है, लेकिन ब्रह्म एक है. परमात्मा एक है, लेकिन अलग अलग नाम और रूप से जाने जाते है.दूर दूर से आए भक्तों ने सुनी कथा
शक्ति मंदिर परिसर जय राधे जय कृष्ण गोविंद गोपाल राधे माधव पर झूम उठा. कथा में काफी संख्या में भक्तों ने श्रीमदभागवत कथा का श्रवण किया. दूर दूर से सैकड़ों की संख्या में लोग कथा का आनंद ले रहे हैं. कथा के मध्य में अनेक दिव्य भजनों का गायन करते हुए देवी जी ने भगवान के अनेक अवतारों और कृपा की कथा का श्रवण कराया. भजनों पर सभी श्रद्धालु जमकर झूमे और अंत में आरती कर प्रथम दिवस की कथा को विराम दिया. यह भी पढ़ें: धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-princes-father-nasirs-bail-application-rejected/">धनबाद: प्रिंस के पिता नासिर की जमानत अर्जी खारिज [wpse_comments_template]
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