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धनबाद : महंगाई से भगवान विश्वकर्मा भी प्रभावित, घट गई मूर्तियों की मांग

Ram Murti Pathak Dhanbad : बढ़ती महंगाई का असर पर्व-त्योहार से लेकर पूजा-पाठ के बड़े आयोजन पर भी पड़ा है. लागत बढ़ने से पूजा में स्थापित होने वाली मूर्तियों की मांग भी घट गई है. इससे मूर्तिकारों का धंधा मंदा पड़ गया है. धनबाद (Dhanbad)">https://lagatar.in/dhanbad-winner-of-rajkamal-saraswati-vidya-mandir-on-the-first-day-of-towing/">(Dhanbad)

हीरापुर निवासी मूर्तिकार दुलाल पाल बताते हैं कि मूर्तियों के कारोबार से लागत भी नहीं निकल पा रहा है. इससे परिवार चलाना भी मुश्किल हो गया है. स्थिति ऐसी है कि नई पीढ़ी अब पुश्तैनी धंधा समेटने को मजबूर है. दुलाल पाल ने बताया कि विश्वकर्मा पूजा नजदीक है. महज 15 दिन बचे हैं, लेकिन अब तक महज 7 मूर्तियों की बुकिंग हुई है. इसी से कमाई का अंदाजा लगा सकते हैं. पहले महीना भर पहले ही बुकिंग शुरू हो जाती थी, इस बार पूजा समितियां भी सुस्त पड़ी हैं. बीसीसीएल, रेलवे, इलेक्ट्रॉनिक दुकानों व वाहनों के शोरूम ने ही बुकिंग कराई है.

आजादी के समय 1947 में बांग्लादेश से आया था परिवार  

[caption id="attachment_408149" align="aligncenter" width="213"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/dulal-pal-1-213x300.jpg"

alt="" width="213" height="300" /> मूर्तिकार दुलाल पाल[/caption] मूर्तिकार दुलाल पाल बताते हैं कि उनके पिताजी एसएन पाल देश की आजादी के समय 1947 में बांग्लादेश से धनबाद आए थे. तभी से उनका परिवार इस पुश्तैनी धंधे में लगा हुआ है. पिता की मौत के बाद उन्होंने धंधा संभाल लिया और अब तक चला रहे हैं. अब उनकी उम्र 66 वर्ष हो गई है. बाप-दादा के पेसे को धंधे को बरकारा रखा है. वे पूरे साल मूर्ति बनाने का काम करते हैं. लेकिन महंगाई बढ़ने, मांग कम होने से धंधा धीरे-धीरे मंदा होता जा रहा है. इससे नई पीढ़ी इस काम को नहीं करना चाहती है.

मूर्ति की कीमत पुरानी, सामग्री के दाम आसमान पर

दुलाल पाल कहते हैं कि कम मांग को देखते हुए हमलोगों ने मूर्ति की कीमत पहले जैसी ही रखी है, लेकिन इसका लागत खर्च काफी बढ़ गया है. कलर, पेंट, कपड़े, बिचाली आदि के दाम आसमान छू रहे हैं. हमलोग 10% लाभ रखकर धंधा करते हैं, लेकिन लागत खर्च बढ़ने से यह भी संभव नहीं हो पा रहा है. ऐस में धंधा बचाना असंभव लग रहा है. सरकार को हमारे पुश्तैनी कारोबार को जीवित रखने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए. तभी मूर्ति कारोबार जीवित रह पाएगा.

मूर्ति बनाने में लगती है यह सामग्री

दुलाल पाल के अनुसार, मूर्ति बनाने में गंगा की मिट्टी, बिचाली, सुतली, बांस, कांटी, पेंट, रंग आदि लगते हैं.

गणेश पूजा में भी के बराबर बिकी बड़ी मूर्ति

दुलाल पाल ने बताया कि इस बार गणेश पूजा में 70 छोटी मूर्तियों की बिक्री हुई, लेकिन बड़ी मूर्तियों की मांग नहीं के बराबर रही. सिर्फ 4 ही बड़ी मूर्ति बिक पाई. कोरोना के दो साल बाद कारोबार अच्छा होने की उम्मीद में इस पर काफी बड़ी मूर्तियों का निर्माण किया था, लेकिन  सिर्फ 4 की ही बिक्री हो पाई.

विश्वकर्मा पूजा पर बीसीसीएल, रेलवे में बड़ा आयोजन  

विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को है. बीसीसीएल, रेलवे, वाहनों के शोरूम में बड़े स्तर पर विश्वकर्मा पूजा का आयोजन होता है. डीआरएम कार्यालय, रेलवे स्टेशन, रेलवे यार्ड, बड़ी फैक्ट्रियों में बड़ी प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा होगी. वहीं, गैराज, पानी टंकी, मोटर पार्ट्स दुकानों व छोटे प्रतिष्ठानों में छोटे रूप में पूजा होती है. पूजा से दो-तीन दिन पहले से ही वाहन वाशिंग सेंटरों पर गाड़ियों की धुलाई के लिए भीड़ शुरू हो जाती है. यह भी पढ़ें :">https://lagatar.in/dhanbad-take-out-an-awareness-rally-in-balliapur-and-tell-how-to-stay-healthy/">

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