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धनबाद : भक्ति की पराकाष्ठा है महारास- आचार्य कन्हैया

Katras : महारास कोई हास्य-व्यंग्य की वस्तु नहीं, बल्कि भक्ति एवं अध्यात्म की पराकाष्ठा है. जीव का जगतपति से मिलन ही महारास है. उक्त बातें वाराणसी से आये कथावाचक आचार्य कन्हैया द्विवेदी जी महाराज ने कहीं. वह कतरास कोलडम्प, दुर्गा कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन 31 मई को भक्तों के बीच भगवान की महिमा का बखान कर रहे थे. कहा कि भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को कंस के अत्याचार से मुक्ति दिलाई. रुक्मणि भगवान से निश्छल प्रेम करती थीं. वह भगवान को पाना चाहती थीं. इसका भान होते ही प्रभु ने उनका हरण कर वरण कर लिया. छठे दिन कथा सुनने के लिए भक्तों की भीड़ जुटी. मौके पर यज्ञ समिति की सरिता देवी, जानकी देवी, विनोद तिवारी, विमला देवी, सोनी देवी, राजेश कुमार, गुरु भगत, इन्द्रनाथ विश्वकर्मा आदि उपस्थित थे. यह भी पढ़ें : धबनाद">https://lagatar.in/dhabnad-nmops-members-will-ring-the-bell-at-the-houses-of-mps-to-implement-the-old-pension-scheme/">धबनाद

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