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धनबाद : सूप, दौरी व मौनी बनाकर करते हैं गुजारा, सरकार से नहीं मिलता कोई सहारा

 
Rammurti Pathak Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) शहर से लगभग 10 किलोमीटर गोपीनाथडीह में महिलाएं व पुरुष बांस से टोकरी, सूप और मौनी बनाकर गुजर-बसर बसर करते हैं. गांव से पैदल 3 घंटे का सफर तय कर हीरापुर मंडी में सामान बेचते हैं और जरूरत की चीजें खरीद कर घर लौट जाते हैं. वर्षों से यही उनकी दिनचर्या है. महिलाओं का कहना है के यातायात की कोई सुविधा नहीं है.  किसी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिलता है. गोपीनाथडीह मोहली जाति की बस्ती है.

     बांस-बर्तन के कारोबार में जुटा है सारा परिवार

[caption id="attachment_410732" align="aligncenter" width="237"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/nikala-devi-237x300.jpeg"

alt="" width="237" height="300" /> निमतली देवी[/caption] गांव के पैरा मोहली ने बताया कि परिवार के सभी लोग बांस खरीदकर टोकरी, मौनी, सूप आदि बनाते हैं. बाजार में बेचते है. कहा कि  बांस 150 रुपये में मिलता है.  उस बांस को पतला- पतला काटकर छठ पूजा के लिए सूप, दौरी, मौनी बनाते हैं. लागत के अनुसार बचत नही होती है. मंडी के साहुकार बड़ी टोकरी 150 रुपये, छोटी मौनी 30 रुपये और सूप 25 रुपये में खरीदते हैं. महिला निमतली देवी का कहना है कि सरकार का कोई सहयोग नही मिलता है. गांव में 100 घर हैं. सभी या तो मजदूरी करते हैं य़ा फिर सूप, दौरी, मौनी बनाकर बाजार में बेचने का काम करते हैं. गांव में यातायत का कोई साधन नही है. किसी तरह गुजर बसर हो रही है.

गांव में पानी की समस्या, यातायात के साधन भी नहीं

[caption id="attachment_410739" align="aligncenter" width="225"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/bijli-devi-1-225x300.jpeg"

alt="" width="225" height="300" /> बिजली देवी[/caption] पार्वती देवी, सुखिया देवी, बिजली देवी की भी यही कहानी है. कहती हैं गांव में न कोई जनप्रतिनिधि आता है और न ही मुखिया. सड़क बनी है लेकिन यातायात का कोई साधन नहीं है. पानी की भी समस्या बनी रहती है. गांव के मुखिया भी कभी हाल चाल लेने नहीं आते है. जब से गांव की सरकार बनी है, कोई उनकी व्यथा सुनने नहीं आया. चुनाव के समय सभी आते हैं, विकास की बात करते हैं.  अगर सरकार ध्यान दे तो कुछ भला हो सकता है, वरना बांस खरीदना, बर्तन बनाना और बेचना तो है ही. पूंजी लगाकर दिन भर मेहनत करते हैं. मगर पूंजी तथा मेहनताना भी मुश्किल से निकल पाता है.

   बचपन से ही कर रहे यही काम, नहीं मिला मुकाम

[caption id="attachment_410740" align="aligncenter" width="225"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/parvati-devi-225x300.jpeg"

alt="" width="225" height="300" /> पार्वती देवी[/caption] सुनीता देवी और मुंगिया देवी ने बताया कि गांव के सभी लोग इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. सभी सूप, दौरी, मौनी बनाकर और बाजार में बेच कर गुजारा करते हैं. बचपन से ही यह काम करते रहे हैं. यह हमारा पुश्तैनी धंधा है. छठ पूजा के समय सूप और दौरी की मांग बढ़ जाती है. इस लिए अभी से ही काम में जुट गए हैं. एक बांस से चार सूप या दौरी तैयार हो जाता है. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-140-people-implanted-prostheses-in-rotary-clubs-free-camp/">धनबाद:

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