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धनबाद : कोयले की काली कमाई से खाकपति से अरबपति बना मैनेजर

Mithilesh Kumar/Raj Kumar Mahto Dhanbad/ Nirsa: मैनेजर उर्फ़ परमेश्वर राय की कहानी कोयले की काली कमाई से खाकपति से अरबपति बनने की है. वे एक न्यूज चैनल के मालिक के साथ मिलकर कोयला कारोबारी राकेश ओझा को ब्लैकमेल [भयादोहन] करने के आरोप में जेल में हैं.

बक्सर से बराकर वाया कुल्टी 

बिहार के बक्सर जिला के अर्जुनपुर गांव में हरिहर राय के घर मैनेजर का जन्म हुआ. अर्जुनपुर से सटे मझवारी गांव के एक बुजुर्ग ने लगातार संवाददाता से फोन पर कहा :` मैनेजर राय का परिवार शुरू से दबंग रहा है. गांव में इनका मुख्य कारोबार खेती है. इस परिवार की दबंगई की चर्चा आसपास के गांवों में है. पैसा धनबाद से कमाए हैं. आज की तारीख में इनके पास अरबों की संपत्ति है.` मैनेजर राय 70 के दशक में रोजगार की खोज में बक्सर से बंगाल आए. कुल्टी की माया नामक एक महिला से उनकी पहचान हुई.

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alt="" width="150" height="150" />भाईयों ने दिया साथ 

बताते हैं कि माया के सहयोग से उन्होंने एक ट्रक खरीदा और कोयला कारोबार शुरू किया. इस ट्रक से रानीगंज से कोयला बनारस जाने लगा. कारोबार में सफलता को देखकर मैनेजर राय का पूरा परिवार बराकर आ गया. पिता हरिहर राय, माता के अलावा दो भाई हरेंद्र राय व उपेंद्र राय को गांव से बराकर आए. एक ट्रक से कई ट्रक के मालिक बना.  दोनों भाई हाथ कामकाज में हाथ बंटाने लगे. कहा जाता है कि ट्रक से दो नंबर का कोयला बनारस भेजने के लिए जीटी रोड के सभी थानों को सेट कर लिया और देखते ही देखते मैनेजर राय खाकपति से अरबपति बन बैठा.आज इसके पास निरसा और मैथन में होटल, कोयला भट्टा, बराकर में आलीशान मकान के साथ आसनसोल, कोलकाता, बक्सर में अकूत सम्पति है. बंगाल के रघुनाथपुर के सरबड़ी में स्पंज आयरन, निरसा के मुगमा, मैथन तथा गोविंदपुर के बरवा में तीन कोयला आधारित उद्योग हैं.

90 के दशक में सुर्खियों में आया 

जानकार बताते हैं कि मैनेजर के साथ रहने वाले सुरेंद्र राय की हत्या 90 के दशक में हो गई. इसी के बाद मैनेजर राय सुर्खियों में आया. इस हत्याकांड में मैनेजर राय का नाम सामने आया. बताया जाता है कि सुरेंद्र का ट्रक मैनेजर राय के अंडर में चलता था. पैसे के लेन-देन में दोनों के बीच दूरियां बढ़ी. हनुमान चढ़ाई के समीप दिनदहाड़े मैनेजर राय के गुर्गों ने लाठी से पीट-पीटकर सुरेंद्र की हत्या कर दी. मृतक ने मौत से पहले पुलिस के समक्ष मैनेजर राय का नाम लिया था. पुलिस की दबिश के कारण मैनेजर को बंगाल छोड़ना पड़ा और वह झारखंड के मुगमा के आवास में परिवार के साथ रहने लगा.

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alt="" width="150" height="150" />2019 में भाजपा में हुआ शामिल

मैनेजर भाजपा के प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्रा के सम्पर्क में आया. भाजपा के अन्य नेताओं के साथ भी सम्बन्ध बनाए. अफसरों से भी दोस्ती की. 2019 में भाजपा में शामिल हो गए. धनबाद जिला कार्यालय में जिला अध्यक्ष चन्द्रशेखर सिंह की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ली. वे अभी तक इस पार्टी में बने हैं. छह वर्ष पूर्व मैनेजर राय के दस ठिकानों पर छापेमारी में करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ था. ब्लैकमनी को व्हाइट किए जाने के साक्ष्य भी मिले थे. यह भी पढ़ें : दुमका">https://lagatar.in/cm-hemant-soren-reached-dumka-on-a-two-day-visit/">दुमका

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