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धनबाद : मजदूरों के हक व सम्‍मान का दिन है 1 मई

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की कोयला खदानों में अपनी जिंदगी झोंक कर पूरे देश को उर्जा देने वाले भोले-भाले मजदूरों को ही मजदूर दि‍वस के बारे में जानकारी नहीं है. मजदूरों की आजादी व हक की याद दिलाने वाला यह विशेष दिन अब सिर्फ कामगार यूनियनों की रस्‍म अदायगी तक ही सीमि‍त रह गया है. हर साल एक मई को हम अतरराष्‍ट्रीय मजदूर दिवस या मई दि‍वस के रूप में मनाते हैं. लेकि‍न न तो कंपनी प्रबंधन और न ही मजदूर संगठन कोयला मजदूर के इस विशेष का महत्‍व समझाने की जरूरत समझते हैं. मजदूर संगठन इस दिन रैली व सभाओं का आयोजन कर अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का महज दिखावा करते हैं. लगातार रिपोर्टर ने मजदूर दिवस पर धनबाद के कोयला मजदूरों से बात की. यहां प्रस्‍तुत है बातचीत का मुख्‍य अंश:

मजदूरा बोले- अब तो काम पर भी आफत 

असंगठित मजदूर सरिता देवी, गोविंद, रामजी, पुष्पा देवी और लालू ने बताया कि मजदूर दिवस के बारे में ज्‍यादा कुछ जानकारी नहीं है. हमें तो एक मई की तारीख भी रोज की तरह लगती है. इस बार भी यूं ही बीत जाएगी. कोई खास नही है. हमें बस रोज मजदूरी चाहिए, ताकि परिवार का भरण-पोषण कर सकें. अब तो मजदूरी पर भी आफत है. मजदूर हित के लिए कोई सोचने वाला नहीं है.

मजदूरों के लिए गर्व का दिन है 1 मई : मासस

मासस से जुड़े मजदूर नेता धर्म कुमार बाउरी कहते हैं कि 1 मई मजदूरों के लिए गर्व का दिन है. काफी संघर्ष के बाद 1 मई को मजदूरों को उनका हक सम्मान मिला था. उसी सम्‍मान में हमलोग 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाते हैं. लेकिन मजदूरों के हक की लड़ाई अभी बाकी है. क्योंकि मजदूरों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, प्रतिदिन काम मिलना चाहिए वह अभी बाकी है. इसके लिए मासस का संघर्ष जारी रहेगा. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=300713&action=edit">धनबाद

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