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धनबाद:  त्याग का अर्थ मोह या मान-सम्मान के लोभ से छुटकारा: पंडित मुन्ना लाल

 

दसलक्षण पर्यूषण महापर्व के आठवें दिन ऋषभ देव भगवान का अभिषेक व त्याग धर्म की पूजा

Dhanbad : दसलक्षण पर्यूषण महापर्व के आठवें दिन मंगलवार 26 सितंबर को धनबाद के धैया स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की पूजा की गई. सवर्प्रथम ऋषभ देव भगवान का अभिषेक व शांति धारा किया गया. पुण्यार्जक थे चक्रेश, अमित जैन और विजय विनीत जैन. .पंडित मुन्ना लाल ने उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि किसी वस्तु विशेष को छोड़ना त्याग नहीं है. त्याग का मतलब अपने भीतर उदारता व अनुग्रह का समावेश भी है. उन्होंने कहा कि जिसने त्याग किया है, संसार में उसका सम्मान हुआ है और जिसने संग्रह किया, उसका संसार में पतन हुआ है. यही कारण है कि जल का दान करने वाले मेघ सदैव ही ऊपर रहते हैं और संग्रह करने वाला समुद्र सदा नीचे रहता है. त्याग व दान का सही प्रयोजन तभी सिद्ध होता है, जब हम जिस चीज का त्याग कर रहे हैं या दान कर रहे हैं उसके प्रति हमारे मन में किसी प्रकार का मोह या मान सम्मान पाने का लोभ न हो. वही उत्तम त्याग है. आज के कार्यक्रम में संजय गोधा, सुशील बाकलीवाल, प्रमोद जैन, संतोष जैन, मयंक जैन, रजत जैन, अंशी जैन, साधना जैन, कामना जैन,उषा जैन ,संतोष देवी, नीलम गोधा, रिद्धि गोधा आदि मौजूद थे. [wpse_comments_template]
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