एक लाख से 10 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान, परिवहन व यातायात विभाग के अधिकारी नहीं करते कार्रवाई
Raja Gupta Dhanbad : बड़े शहरों की तरह कोयले की राजधानी धनबाद में भी सड़कों पर मॉडिफाइड गाड़ियां फर्राटे भर रही है. मॉडिफाइड गाड़ियां जैसे कार-बाइक की आजकल खूब ट्रेंड है. आंखों को चौंधियाती लाइट्स, हूटर और प्रेशर हार्न से सजी बाइकें चलानेवालों को जोश से भर देती है. कार-बाइक के मॉडिफिकेशन के शौक को छोड़ दें तो बेहतर होगा, वरना कभी भी भारी भरकम चालान कट सकता है. हालांकि सड़कों पर युवा मोटर व्हीकल एक्ट का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अभी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. अधिकारियों, यातायात पुलिस की नजरों के सामने से मॉडिफाइड गाड़ियां तेज रफ्तार के साथ गुजरती है, लेकिन उसे रोकते तक नहीं है. बल्कि उन गाड़ियों को ऐसे देखते हैं, जो विदेश से नई कीमती गाड़ी सड़क पर आई हो. जबकि ऐसे गाड़ी मालिकों के खिलाफ 10 हजार से एक लाख तक का जुर्माना का प्रावधान है. अपने हिसाब से प्रेशर हॉर्न लगाया, हूटर, रिफ्लेक्टर या फिर कानफोडू साइलेंसर लगाए तो चालान कटना तय है. बाइक-कार की मॉडिफाइड करानेवाले गाड़ी मालिक ही नहीं बल्कि सर्विस सेंटर पर भी कार्रवाई का प्रावधान है. अवैध तरीके से उपकरण बेचनेवाले दुकानदार, ऐसी चीजें बेचने वाले एजेंसियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है. अभी धनबाद शहर के हीरापुर, बैंकमोड़, झरिया, कतरास, निरसा समेत कई इलाकों में मोडिफाइड साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न समेत कई तरह के उपकरण बिक रहे हैं.प्रेश हॉर्न की कीमत 4 हजार और साइलेंसर की 10 हजार रुपये
जानकारी के अनुसार प्रेशर हॉर्न की कीमत बाजार में चार हजार है. वहीं साइलेंसर की कीमत 10 से 20 हजार तक है. बुलेट में लगी साइलेंसर की आवाज गोलियां चलने जैसी लगती है. बाइक व कार में लगे प्रेशर हॉर्न से ऐसा लगता है कि जैसे कान बहरे हो जाएंगे या फिर सिर फट जाएगा. फिर भी धनबाद में किसी भी इलाके में यातायात या परिवहन विभाग के अधिकारी अभियान नहीं चला रहे हैं. सिर्फ बाइक चालकों से हेलमेट, ट्रीपल राइडिंग की चेकिंग करते हैं. लोगों का कहना है कि गाड़ियों में निर्धारित मानकों वाले साइलेंसर व हॉर्न की जगह लोग मॉडिफाइड साइलेंसर व हॉर्न लगाते हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है. ऐसे लोगों के खिलाफ विभागीय अधिकारी को कार्रवाई करनी चाहिए. काला शीशा भी लगाना गैरकानूनी है, फिर भी विभाग मौन है. जानकारों का कहना है कि कई बाइकों व कारों में मोटे टायर लगाकर अलग लुक दिया जा रहा है तो कहीं उसकी सीटों, पेट्रोल टंकी व स्ट्रक्चर में फेरबदल कर ड्रीम व्हीकल तैयार किया जा रहा है. मॉडिफाइड किए जानेवाली दोपहिया वाहन में बुलेट सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है. इसके बाद दूसरे ब्रांड के दोपहिया वाहन हैं. मॉडिफिकेशन का शौक कार मालिकों के भी सिर चढ़कर बोल रहा है. इन वाहनों से अपराध किए जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.मॉडिफिकेशन में बाइक में 50 हजार तो कार में 5 लाख तक खर्च
शहर में बाइक-कार की मॉडिफिकेशन का काम कर रहे अजय कुमार का कहना है कि उनके पास सर्विस सेंटर के साथ उपकरण बेचने की दुकान भी है. अभी तक दर्जनों गाड़ियों को मॉडिफाइड कर चुके हैं. मॉडिफाइड की गई बाइक की कई शहरों में डिमांड है. वह इंजन को छोड़कर बाकी के सभी पार्ट्स बदल देते हैं. युवा मॉडिफिकेशन के शौक को पूरा करने में पैसे की परवाह नहीं करते हैं. बाइक में युवा में 50 हजार से एक लाख और कार में 5 में लाख तक खर्च कर देते हैं. इसे भी पढ़ें : लालू">https://lagatar.in/ed-arrested-lalus-close-aide-and-sand-king-subhash-yadav-court-sent-him-to-judicial-custody/">लालूके करीबी व बालू किंग सुभाष यादव को ईडी ने किया गिरफ्तार, कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा [wpse_comments_template]
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