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धनबाद नगर निगम चुनाव: कांग्रेस-झामुमो में तकरार तेज, बयानबाजी से महागठबंधन पर सवाल

Dhanbad : धनबाद नगर निगम चुनाव राजनीतिक गरमाहट के दौर में पहुंच चुका है. विकास योजनाओं व शहर की बुनियादी जरूरतों पर केंद्रित बहस अचानक व्यक्तिगत आरोपों व वैचारिक हमलों में बदल गई है. राज्य के सत्ताधारी महागठबंधन की दो प्रमुख सहयोगी पार्टियां कांग्रेस व जेएमएम आमने-सामने हो गई हैं. यह टकराव न केवल स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि राज्य स्तर पर भी इसके दूरगामी संकेत माने जा रहे हैं.

 

संतोष सिंह का विवादित बयान, मेयर प्रत्याशी पर गंभीर आरोप

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विवाद की शुरुआत कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष सिंह के बयान से हुई. उन्होंने झामुमो समर्थित मेयर प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें संघी हाफ पैंटिया करार दिया. संतोष सिंह का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान अग्रवाल कांग्रेस में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे. जब कांग्रेस आलाकमान ने राय मांगी तो स्पष्ट कर दिया गया कि आरएसएस विचारधारा से जुड़े व्यक्ति के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं है.


संतोष सिंह ने अग्रवाल के कार्यकाल पर भी सवाल उठाए. आरोप लगाया कि विकास के नाम पर अपेक्षित कार्य नहीं हुए. ग्लोबल टेंडर व अन्य वित्तीय प्रक्रियाओं के जरिए धन अर्जन पर अधिक ध्यान दिया गया, जबकि प्रदूषण नियंत्रण, जलापूर्ति, सड़क निर्माण व ओवरब्रिज जैसी आधारभूत जरूरतों पर ठोस पहल नहीं हुई. उनके कार्यकाल में सात आईएएस अधिकारियों का तबादला हुआ. जो अधिकारी अनियमितताओं में सहयोग नहीं करते थे उनका 2 से 6 महीने के भीतर स्थानांतरण कर दिया जाता था. ऐसे में झामुमो का उन्हें समर्थन देना समझ से परे है.

 

झामुमो का पलटवार: गैर जिम्मेदाराना बयान, गठबंधन पर असर

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कांग्रेस जिलाध्यक्ष के इस बयान पर झामुमो ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. झामुमो जिलाध्यक्ष लक्खी सोरेन ने इसे गैर-जिम्मेदाराना व दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. कहा कि गठबंधन सरकार में इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी महागठबंधन की छवि को नुकसान पहुंचाती है. लक्खी सोरेन ने स्पष्ट किया कि पार्टी के निर्देश सर्वोपरि होते हैं और व्यक्तिगत टिप्पणियों से परहेज किया जाना चाहिए. उन्होंने संतोष सिंह के मजबूत जिलाध्यक्ष होने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में उनके अपने बूथ पर कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 18 वोट मिले थे.

दलीय चुनाव नहीं, फिर भी सियासी टकराव 

नगर निगम चुनाव दलीय आधार पर नहीं लड़ा जा रहा है. इसके बावजूद सत्ताधारी गठबंधन के घटक दलों के बीच खुली बयानबाजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय सत्ता की लड़ाई ने राजनीतिक समीकरणों को जटिल बना दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह महज चुनावी बयानबाज़ी नहीं, बल्कि नगर निगम की सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीतिक जंग है. जिस तरह विचारधारा और व्यक्तिगत निष्ठा को सार्वजनिक मंच पर मुद्दा बनाया जा रहा है, उससे राज्य सरकार के भीतर तालमेल व अनुशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं. अब नजर इस बात पर है कि क्या पार्टी हाईकमान हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालेगा, या फिर चुनाव तक बयानबाज़ी और तेज होगी. फिलहाल, धनबाद नगर निगम चुनाव महागठबंधन की एकजुटता की बड़ी परीक्षा बन गया है.

 


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