Dhanbad : बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद (Dhanbad)">https://lagatar.in/lean-manufacturing-system-should-be-implemented-in-the-hardcoke-industries-of-dhanbad-rajeev-sharma/">(Dhanbad)
के नए कुलपति डॉ. सुखदेव भोई को लिट्टी-चोखा काफी पसंद है. ओडिशा के साधारण परिवार में जन्मे प्रोफेसर भोई का रहन-सहन से लेकर पहनावा, खानपान सबकुछ साधारण है. शुद्ध शाकाहारी हैं. नशा के नाम पर कभी-कभार मीठा पान खा लेते हैं. नौकरी लगी तो घर में टीवी खरीदा. फिल्मों में रूचि नहीं, जब मन किया तो टीवी पर सीरियल देख लिया. ओडिशा के नजदीक रहने के बाद भी झारखंड से कभी जुड़ाव नहीं रहा. पहली बार धनबाद (झारखंड) आए उड़िया वीसी से लगातार मीडिया के रिपोर्टर Ram Murti Pathak ने कुछ निजी सवाल पूछे : सवाल : झारखंड से आपका कितना जुड़ाव रहा, धनबाद कैसा लग रहा है? जवाब : झारखंड आने का कभी मौका नहीं मिला. पहली बार आया हूं. यहां से ज्यादा जुड़ाव नहीं रहा. बिहार के कई विश्वविद्यालयों से डायरेक्ट कनेक्शन रहने के कारण बिहार के बारे में काफी कुछ जानता हूं. वहां अक्सर आना-जाना होता रहा है. फिर, झारखंड भी तो पहले बिहार का ही हिस्सा रहा है. सच कहें, तो झारखंड के लोग बिहारियों से अच्छे हैं. जहां तक धनबाद की बात है, तो यह अच्छी जगह है. माइनिंग, आईआईटी आईएसएम इसकी खासियतें हैं. सवाल : परिवार में कौन-कौन हैं? जवाब : पत्नी और एक बेटी बस. सवाल : क्या खाना पसंद करते हैं? जवाब : रोटी, दाल, सब्जी और सलाद. चावल कम खाता हूं. लिट्टी और चोखा ज्यादा पसंद है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) के बिरला हॉस्टल का वार्डन रहा हूं. वहां ज्यादातर स्टूडेंट बिहार के थे. बिहार के भभुआ के बच्चे मेरे घर के आंगन में आकर लिट्टी-चोखा बनाते थे. मेरा भी जायका बन जाता था. हफ्ते में एक बार पटना यूनिर्विसिटी जाना होता था. वहां ठेले की लिट्टी और चोखा काफी पंसद था. आरा के एक प्रोफेसर काफी करीबी थे, उनके घर से भी लिट्टी बनकर आती थी. बनारस में रहने के दौरान कभी-कभी तो लिट्टी खाने इलाहाबाद चला जाता था. वहां हाईकोर्ट के पास एक ठेले वाला लिट्टी को घी में डूबोकर चोखा के साथ देता था. खाने में काफी स्वादिष्ट लगता था. सवाल : प्रोफेसर कैसे बने? जवाब : भगवान का आशीर्वाद है कि पहले लेक्चरर और बाद में प्रोफेसर बना. सवाल : आपकी प्रिय पुस्तक कौन सी है? जवाब : ऐसा नही है. जो पुस्तक अच्छी लगी, पढ़ लेता हूं. जैसे हर किसी को हर मिठाई पसंद नहीं. सवाल : आपने कोई किताब लिखी है? जवाब : मैंने ज्यादा किताबें नहीं लिखी है. मेरी पहली किताब समिक्ता अध्ययन संस्कृत में है, जिसके लिए मुझे पुरस्कार भी मिला था. वहीं, दूसरी किताब ब्रह्म जिज्ञासा है. सवाल : किस फ़िल्म को देखकर ज्यादा प्रभावित हुए? जवाब : नहीं भाई, मैं फिल्में नहीं देखता. बेवजह पैसा बर्बाद होता है. काफी साधारण परिवार से हूं. घर में टीवी भी नहीं था. जब नौकरी लगी, तो पहली बार घर में टीवी आया था. कभी-कभी टीवी पर ही सीरियल देख लेता हूं. एक बार फिल्म जरूर देखी थी, लेकिन उसका नाम भूल गया हूं. सवाल : इतिहास के कौन से पात्र प्रिय हैं? जवाब : महात्मा गांधी और विवेकानंद से प्रभावित हूं. सवाल : कोई नशा-पानी? जवाब : अरे नहीं भाई, कभी नशा नहीं किया. बनारस का पान फेमस है. लेकिन जब तक बनारस में रहा कभी पान नहीं खाया. जब वहां से आने लगा तो लोग कहने लगे- बनारस में रहे हो यहां का पान तो खा लो. फिर भी नहीं खाया. जब दिल्ली गया तो वहां सामने पान की दुकान देख मीठा पान खाया था. उसके बाद से कभी-कभार मीठा पानी ख लेता हूं. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-no-hurry-to-shift-university-to-new-building-dr-sukhdev-bhoi/">धनबाद
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