alt="" width="300" height="152" /> मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु[/caption] मौके पर मौजूद गोपाल महतो ने बताया कि झारखंड के लोकप्रिय चड़क पूजा से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि शिव पार्वती के प्रति भक्ति व अटूट विश्वास के कारण शरीर के हाथ, पैर, सीने, पीठ यहां तक की जीभ में भी कील चुभाने के बाद किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. उन्होंने बताया कि इस बार करीब 80 से 100 लोगों ने उपवास रखा और दर्जनों युवाओं ने अपने शरीर में कील चुभोकर 40 फीट ऊंचे खूटे पर लटककर परिक्रमा की. इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुटी. आसपास मेला लगा रहा. [wpse_comments_template]
धनबाद : भूली में चड़क पूजा पर युवाओं ने कील चुभोकर खूटे पर की परिक्रमा
Bhuli :भूली सी ब्लॉक काली मंदिर में बुधवार 19 अप्रैल को चड़क पूजा श्रद्धा के साथ मनाई गई. इस अवसर पर भूली बस्ती के सात टोलों के युवाओं ने शिव आराधना को लेकर तीन दिनों का उपवास रखा व अपने शरीर में लोहे की कील चुभोकर चिलचिलाती धूप में करीब 40 फीट ऊंचे लकड़ी के खंभे में लटककर परिक्रमा की. [caption id="attachment_613433" align="aligncenter" width="300"]
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alt="" width="300" height="152" /> मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु[/caption] मौके पर मौजूद गोपाल महतो ने बताया कि झारखंड के लोकप्रिय चड़क पूजा से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि शिव पार्वती के प्रति भक्ति व अटूट विश्वास के कारण शरीर के हाथ, पैर, सीने, पीठ यहां तक की जीभ में भी कील चुभाने के बाद किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. उन्होंने बताया कि इस बार करीब 80 से 100 लोगों ने उपवास रखा और दर्जनों युवाओं ने अपने शरीर में कील चुभोकर 40 फीट ऊंचे खूटे पर लटककर परिक्रमा की. इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुटी. आसपास मेला लगा रहा. [wpse_comments_template]
alt="" width="300" height="152" /> मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु[/caption] मौके पर मौजूद गोपाल महतो ने बताया कि झारखंड के लोकप्रिय चड़क पूजा से लोगों की आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि शिव पार्वती के प्रति भक्ति व अटूट विश्वास के कारण शरीर के हाथ, पैर, सीने, पीठ यहां तक की जीभ में भी कील चुभाने के बाद किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है. उन्होंने बताया कि इस बार करीब 80 से 100 लोगों ने उपवास रखा और दर्जनों युवाओं ने अपने शरीर में कील चुभोकर 40 फीट ऊंचे खूटे पर लटककर परिक्रमा की. इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुटी. आसपास मेला लगा रहा. [wpse_comments_template]

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