जिले के सहियाओं ने 23 सितंबर को सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर धरना दिया. सरकार, स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की. निरसा के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने मौके पर पहुंचकर सहियाओं का समर्थन किया. कहा कि सरकार जल्द से जल्द मांगों की पूर्ति करे. सहिया रीता देवी ने बताया कि वर्ष 2005 से ही एनएचआरएम के तहत लगातार वे लोग सेवा दे रहीं हैं. उनकी मेहनत की बदौलत ही जिले में मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आई है. कोरोना काल में भी सहियाओं ने जान जोखिम में डालकर काम किया. राज्य सरकार मानदेय के नाम पर मामूली राशि दे रही है. इससे परिवार का गुजारा नहीं चल पा रहा है. सहियाओं ने कहा कि उनके भरोसे ही स्वास्थ्य विभाग की कई योजनाएं चल रही हैं. जननी शिशु सुरक्षा योजना, शिशु सुरक्षा योजना, गर्भवती महिलाओं की जांच, फाइलेरिया रोधी दवा खिलाना, कोरोना संक्रमण काल में घर-घर जाकर मरीजों की पहचान समेत कई काम का जिम्मा उनलोगों ने ईमानदारी से निभाया. लेकिन अब जब प्रोत्साहन राशि की मांग की जा रही है तो विभाग के अधिकारी पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं.
ये हैं सहियाओं की मुख्य मांगें
सहियाओं की मुख्य मांगों में मानदेय बढ़ाकर 24 हज़ार करने, स्थायीकरण कर राज्य सरकार के कर्मी का दर्जा देने, अस्पताल में रेस्ट रूम की व्यवस्था करने, कोविड सहित अन्य कार्यों के बकाए का भुगतान दुर्गा पूजा से पहले करने, ग्रामीण और शहरी सहियाओं में भेदभाव बंद करने, शहरी क्षेत्र की सहियाओं को बहाल करने की मांग शामिल हैं. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-villagers-stop-the-work-of-outsourced-company-in-protest-against-dumping-of-ob/">धनबाद: ओबी डंप करने के विरोध में ग्रामीणों ने आउटसोर्स कंपनी का काम ठप किया [wpse_comments_template]

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