Search

धनबाद:  मई दिवस पर कभी निरसा के पीठाकियारी बलिदानी मैदान में लगता था मेला

Niraj Kumar Dhanbad : एक मई यानी मजदूर दिवस. यह दिवस मजदूरों के लिए खास है. इस दिन मजदूर बहुल इलाकों में कई कार्यक्रम आयोजित होते हैं. इसी कड़ी में एक समय मजदूर बहुल क्षेत्र निरसा के पीठाकियारी के बलिदानी मैदान (शहीद मैदान) में ऐतिहासिक मजदूर मेला लगता था. इस बलिदानी मैदान में स्थापित प्रतीक चिन्ह हसिया-हथौड़ा पर पुष्प चढ़ाकर बलिदानी मजदूरों को नमन किया जाता था. यहां सात दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता था. लेकिन वर्ष 2010 से यहां  इस पावन दिन पर भी सन्नाटा पसरा रहता है. निरसा का यह ऐतिहासिक मेला अब केवल यादों में ही सिमट कर रह गया है. सिर्फ क्षेत्र के मजदूर नेता या पुराने निरसावासी ही इस मेले की चर्चा करते हैं.

   वर्ष 1978 में हुई थी मेले की शुरुआत

वर्ष 1978 में निरसा कारखाना बहुल क्षेत्र था. यहां उद्योग धंधों की भरमार थी. हज़ारों मजदूर उन कल-कारखानों में काम कर रोजी-रोटी का जुगाड़ करते थे. रोजी-रोटी थी तो उसके लिए संघर्ष भी था, शोषण की परंपरा भी थी. मजदूरों के संघर्ष की बदौलत मई दिवस भी उत्सव की तरह मनाया जाता था. तब मार्क्सवादी समन्वय समिति के नेता व तत्कालीन विधायक केएस चटर्जी की पहल पर इस मेले की शुरुआत हुई थी. तब से प्रत्येक वर्ष एक मई के दिन मजदूरों द्वारा 7 दिनों का उत्सव मनाया जाता था. वर्ष लगातार 32 वर्ष व 2010 तक तक मेले का आयोजन हुआ. बाद के दिनों में कोलियरी को छोड़कर निरसा के लगभग सभी उद्योग धंधे समाप्त हो गए. इसके बाद बलिदानी मेला भी वर्ष 2010 में बंद हो गया. परंतु आज भी मई दिवस पर मजदूर संगठन यहां पुष्प चढ़ाने पहुंचते हैं. [wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp