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धनबाद: सात साल में शहर के सिर्फ 6,255 लाभुकों को मिला पीएम आवास

 Mithilesh Kumar Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) प्रधानमंत्री आवास योजना वर्टिकल चार के तहत शहर में निम्न आय वाले लोगों का पक्के मकान का सपना आज भी अधूरा है. इस योजना की रफ्तार काफी धीमी है. पिछले सात साल में मात्र 9 हजार 292 लोगों को योजना की स्वीकृति मिली, जिनमें से 6 हजार 255 लाभुकों के पक्के मकान का सपना पूरा हो पाया है. 3037 लोग अब भी सरकारी राशि के इंतजार में बैठे हैं.

   इस साल सिर्फ 358 लोगों को मिली स्वीकृति

पीएम आवास योजना का काम देख रहे नगर प्रबंधक अमनदीप सिन्हा ने बताया कि योजना में पिछली गड़बड़ियों को देखते हुए फूंक फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं. इस साल फरवरी में नगर विकास विभाग से नए लाभुकों की सूची मांगी थी. एक हजार से अधिक आवेदन आये. सभी कागजात की जांच के बाद सिर्फ 358 लोग ही योग्य पाए गए. विभाग से इन सभी की स्वीकृति मिल गई है. निर्माण कार्य को देखते हुए खाते में राशि भेजी जा रही है. कोरोना काल यानी वर्ष 2020-21 में 15 करोड़ 21 लाख रुपये लाभुकों के खाते में भेजे.  21-22 का बैंक स्टेटमेंट उपलब्ध नहीं है. अभी 24 लाख की रिपोर्ट तैयार है. राशि जल्द ही लाभुकों के खाते में भेज दी जाएगी.

   एक मकान बनने में लग रहा डेढ़ से दो साल

इस योजना के तहत सरकार चार किस्तों में लाभुकों के बैंक खाते में सवा दो लाख रुपया देती है. नक्शा बनाने से लेकर मकान तैयार कराने का काम निगम की देखरेख में पूरा कराया जाता है. नगर विकास विभाग के निर्देशनुसार छह माह में एक मकान का निर्माण पूरा होना चाहिए. लेकिन निगम के अधिकारी कहते हैं कि अभी तो चार चार साल पुराने काम ही लटके हुए हैं. लाभुक कम से कम डेढ़ से दो साल में मकानन का काम पूरा करा रहे हैं. करीब 150 लोगों ने योजना की राशि दूसरे मद में खर्च कर दी है.  उन्हें लगातार नोटिस भेजा जा रहा है. भरपूर समय दिया जा रहा है. काम शुरू नहीं होने पर उनसे राशि वापस ली जाएगी.

   योजना के फिसड्डी होने का कारण यह भी

पीएम आवास योजना के फिसड्डी होने का कारण बालू भी है. पिछले चार साल से बालू घाटों की बंदोबस्ती लंबित है. एनजीटी के आदेश पर दस जून से 15 अक्टूबर तक बालू का उठाव भी प्रतिबंधित है. इस कारण लाभुकों को बालू खरीद में परेशानी हो रही है. इसके अलावा शहरी क्षेत्र के ज्यादातर लाभुक बीसीसीएल और रेलवे की जमीन पर बसे हैं. उनके पास अपनी जमीन है, उनके घर में पारवारिक विवाद है. सब कुछ ठीक होने के बाद भी निगम के लफड़े अलग हैं. योजना का लाभ पाने के लिये स्थानीय पार्षदों सहित निगम के अधिकारियों और कर्मियों को भी खुश करना पड़ता है. बीच में यदि कोई बिचौलिया है तो उसे अलग से नजराना देना पड़ता है. निगम की जांच में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. यह भी पढ़ें:  धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-contained-a-container-of-postal-parcel-full-of-cow-progeny-in-barwada/">धनबाद:

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