पुरुषों की तुलना में महिलाएं आगे
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार परिवार नियोजन में लैंगिक विषमता बरकरार है. आम तौर पर पुरुष नसबंदी नहीं कराना चाहते हैं. वित्तीय वर्ष 2021-2022 में 2800 महिलाओं का बंध्याकरण किया गया था, जबकि 56 पुरुषों की नसबंदी की गई थी. 2022-23 में मात्र 2 लोगों ने ही नसबंदी का ऑपरेशन कराया.नसबंदी को लेकर भ्रम बरकरार
वजह पुरुषों के बीच नसबंदी से बीमार पड़ने, कमजोरी होने आदि का भ्रम फैला हुआ है. बंध्याकरण के लिए 66 का ऑपरेशन ही हो सका. नसबंदी को लेकर भ्रम बरकरार है. महिलाएं भी पति को नसबंदी कराने की सलाह नहीं देती हैं. महिलाओं को लगता है कि पति बीमार या कमजोर हो सकते हैं. चूंकि घर में कमाऊ सदस्य समान्यत: पुरुष ही होते हैं. इसीलिए महिलाओं को लगता है कि पुरुषों को परेशानी न हो. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी कहते हैं कि कहीं पुरूष आगे नहीं आना चाहते हैं, तो कहीं महिलाएं ही रोक देती है. इसके साइड इफेक्ट को लेकर भी भ्रम है.बंध्याकरण के लिए 2200, नसबंदी के लिए 1600
परिवार नियोजन में लोगों की सहभागिता को लेकर सरकार ऑपरेशन कराने वालों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान कर रही है. बंध्याकरण कराने वाली महिलाओं को 22 सौ रुपये दिये जाते हैं, जबकि नसबंदी के लिए पुरुष को 16 सौ रुपये दिये जाते हैं. यह राशि लाभुक के अकाउंट में दी जाती है. बंध्याकरण के लिए संबंधित प्रेरक को तीन सौ व नसबंदी के प्रेरक को दो सौ रुपये मिलते हैं.जिम्मेदारी पति-पत्नी दोनों की : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन आलोक विश्वकर्मा ने बताया कि छोटा परिवार सुखी परिवार की जिम्मेदारी पति-पत्नी दोनों की है. कुछ लोग भ्रम के कारण लोग नसबंदी कराने नहीं आते हैं. इसलिए स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है. बेहतरी की कोशिश जारी रहेगी. यह भी पढ़ें: धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-three-classes-run-in-the-same-room-of-the-school-children-studying-sitting-on-the-ground/">धनबाद:स्कूल के एक ही कमरे में चलते हैं तीन क्लास, जमीन पर बैठ पढ़ाई कर रहे बच्चे [wpse_comments_template]

Leave a Comment