रेलवे स्टेशन के समीप स्थित फूल दुकानदारों से जुड़ा है. साइबर अपराधियों ने सीआईएसएफ व सीआरपीएफ अधिकारी बनकर 23 जून को तीन फूल दुकानदारों को फोन कर फूल का ऑर्डर दिया और ऑनलाइन पेमेंट करने की बात कह उनके बैंक खाते से पैसे उड़ाने के लिए उनकी डिटेल लेने की कोशिश की. हालांकि डिटेल नहीं देकर दुकानदार ठगी से बच गए. मामला सामने आने के बाद से फुल दुकानदारों ने फोन पर ऑडर और ऑनलाइन पेमेंट लेना बंद कर दिया है.
फोन कर 4 वरमाला व गुलदस्ता की बॉस्टकेट का दिया ऑर्डर
रेलवे स्टेशन के सामने स्थित फूल दुकानदार सुधीर कुमार ने बताया कि उसके मोबाइल पर व्यक्ति का फोन आया. उसने बताया कि वह CISF अधिकारी बोल रहा है. उसने गुलाब फूल की 4 वरमाला व 5 बॉस्केट गुलदस्ता बनाने का आर्डर दिया. सामान डिलीवरी का पता सीआईएसफ यूनिट कोयलानगर बताया और एडवांस के तौर पर एंड्रायड मोबाइल पर पेमेंट लेने को कहा. दुकानदार ने कहा कि उसके पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है. इस पर उसने कहा कि सामान तैयार कर सीआईएसफ यूनिट कोयलानगर भेज दो, वहीं पर ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा. जब दुकानदार वरमाला व गुलदस्ता की बॉस्केट लेकर सीआईएसएफ यूनिट कोयलानगर पहुंचा और ऑर्डर देने वालो को फोन कर इसकी जानकारी दी, तो वह सामान इधर-उधर रखने की बात करने लगा. इसी में काफी देर हो गई. अंत में उसने कहा कि कैंप में सामान रख कर चले जाओ, पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया जाएगा. इसी बीच सीआईएसएफ का एक अधिकारी आया और दुकानदार से ऑर्डर करने वाले की जानकारी मांगी. इस पर उसने उक्त व्यक्ति को फोन बात कराई. वह खुद को सीआईएसएफ अधिकारी बताते रहा. जब असली सीआईएसएफ अधिकारी ने पूछा कि आप किस बैच के हो, तो उसने फोन काट दिया. इसके बाद उस नंबर पर कई बार फोन किया गया, लेकिन उसने रिसीव नहीं किया. दुकानदार ने बातया कि वरमाला और गुलदस्ता की बास्केट बनाने में उसे 5 हजार रुपए का नुकसान हुआ है, लेकिन भगवान का शुक्र है कि ठगी से बच गया. दुकानदार ने साइबर थाना धनबाद में मामला दर्ज करा दिया है.दूसरे दुकानदार को एक रुपए भेज मांगा UPI पिन
दूसरी घटना फूल दुकानदार विकास कुमार मालाकार के साथ हुई. विकास ने बताया कि उसे एक नंबर से कॉल आई. फोन करने वाले ने खुद को सीआरपीएफ 162 बटालियन, बलियापुर का अधिकारी बता कर गुलाब की 4 वरमाला व 3 गुलदस्ता का ऑर्डर दिया. कहा कि सामान तैयार कर सीआरपीएफ 162 बटालियन बलियापुर डिलीवरी कर दो. दूर होने की बात कहने पर उसने कहा कि सामान रेडी रखो, हमारे बंदे पहुंच कर ले लेंगे. तब तक कुछ एडवांस पेमेंट कर देता हूं. उसने वाट्सएप पर पहले 1 रुपया भेजा और कहा कि इसे एक्सेप्ट कर लों, बाकी रुपए तुरंत भेज दूंगा. जब दुकानदार ने वाट्सएप खोल कर देखा, तो इंडियन आर्मी लिखा बारकोड मिला, जिस पर ₹1 लिखा हुआ था. उसे डाउनलोड करने पर फोन करने वाले ने कहा कि अपना यूपीआई पिन बताओ, यूपीआई पिन डालते ही पेमेंट चला जाएगा पेमेंट. तब दुकानदार को साइबर ठगी का अहसास हुआ और उसने यूपीआई पिन नहीं डाला और ठगी का शिकार होने से बच गया. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/rugda-six-hundred-rupees-a-kg-in-the-market-of-dhanbad/">धनबादके बाजार में `रुगड़ा` छह सौ रुपए किलो [wpse_comments_template]

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