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धनबाद: एसएनएमएमसीएच में तीन माह में 1 करोड़ का पानी पी गए मरीज के परिजन

Dhanbad : शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ( एसएनएमएमसीएच ) में इन दिनों बोतल बंद पानी का कारोबार चरम पर है. पानी कारोबारियों का सक्रिय गिरोह अस्पताल में आम जनता के लिए लगी नलों की अधिकतर टोटियां गर्मी आने से पहले ही गायब कर देता है या तोड़ देता है. हालत यह है कि अस्पताल में 2000 से अधिक मरीज व परिजन बोतल बंद पानी पर निर्भर हो गए है. इधर दुकानदार व पानी कारोबारी गर्मी के तीन महीने में लगभग एक करोड़ से अधिक का कारोबार कर लेते हैं, जबकि मरीज व उनके परिजन एक माह में पानी पर 36 लाख रुपये, जबकि गर्मी के तीन माह में 1 करोड़ से अधिक खर्च करने पर विवश हैं

       गर्मी के तीन माह कारोबारियों की चांदी

[caption id="attachment_621311" align="aligncenter" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/water-bottle-300x225.jpeg"

alt="" width="300" height="225" /> पानी की बंद बोतल[/caption] 550 बेड वाला अस्पताल मरीजों व परिजनों से खचाखच भरा रहता है. एक मरीज के पीछे करीब 2 परिजन यानी कि 500 मरीजों के साथ 1000 परिजन. हिसाब मिलाएं तो 1500 लोग मौजूद रहते हैं. इसके अलावा ओपीडी और इमरजेंसी को मिला कर प्रतिदिन लगभग 500 लोगों  आना जाना होता है. इस हिसाब से प्रतिदिन 2000 लोग अस्पताल में होते हैं. एक बोतल पानी की कीमत 15 से 20 रुपये है, जबकि प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 3 से 4 लीटर पानी खर्च होता है, जिसकी कीमत होती है 60 रुपये. मतलब 2000 लोग प्रतिदिन पानी के 6000 (लीटर) बोतल खरीदते हैं यानी प्रतिदिन 1,20,000.  हिसाब मिलाएं तो महीने में 36,00000 रुपये का पानी. कुल मिलाकर देखा जाए तो मात्र तीन महीने में कुल 10,800,000 रुपये का कारोबार होता है.

   घर से पानी लाते हैं मरीजों के परिजन

550 बेड वाले अस्पताल परिसर में लगे दस नल में से आठ की टोटियां गायब हैं. इस 44 डिग्री तापमान में मरीज व परिजनों के लिए अस्पताल के चालू दो नल जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं. दोपहर के वक्त खाना खाने के बाद पानी की अधिक आवश्यकता पड़ती है. लेकिन तभी नल का पानी पीना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि पानी काफी गर्म हो जाता है. ऐसे में लगभग 85% मरीज व उनके परिजन अस्पताल के बाहर दुकानों से ठंडे पानी की बंद बोतल खरीद कर पी रहे हैं. कई मरीजों के परिवार घर से भी पानी ला रहे हैं.

 क्या कहते हैं मरीज व परिजन

गिरिडीह के रहने वाले अशोक शाश्वत बताते हैं कि अपने पुत्र के एक्सीडेंट होने के बाद पांव का ऑपरेशन कराने के लिए उसे भर्ती कराया है. वह बताते हैं कि अस्पताल का पानी सही न होने तथा नल टूटे होने के कारण पिछले 10 दिनों से अस्पताल परिसर के आसपास की दुकानों से पानी खरीद कर पी रहे हैं. उनका कहना है कि विगत 10 दिनों में पुत्र और पिता मिलकर लगभग 1500 रुपये से अधिक का पानी खरीद चुके हैं.   निरसा के कलियासोल निवासी चंद्रशेखर हासदा बताते हैं कि अपनी पत्नी को इलाज के लिए पिछली 25 तारीख को भर्ती कराया. और तब से लेकर आज तक पीने के पानी के लिए बंद बोतल का उपयोग कर रहे हैं. वह बताते हैं कि अस्पताल का पानी पीने योग्य नहीं है, जिस कारण कभी तो घर से पानी लाते हैं. लेकिन वह ज्यादा समय टिक नहीं पाता. अंततः बंद बोतल पानी खरीदना पड़ रहा है. ठंडे पानी की बोतल की कीमत 20 रुपये है.

  क्या कहते हैं जिम्मेवार

एसएनएमएमसीएच के प्रभारी अधीक्षक डॉ ए के सिंह का कहना है कि मरीजों के लिए लगे नल की कई टोटियां टूटी हुई हैं या गायब हो गई हैं. परंतु कारण पता नहीं है. उनका कहना है कि नल की टोटियां किसी खास गिरोह द्वारा साजिश के तहत गर्मी आने से पहले तोड़ दी जाती हैं या फिर खुद ब खुद टूट जाती हैं. इसका पता हम जल्द ही करेंगे. फिलहाल शीघ्र ही इसे दुरुस्त किया जाएगा. [wpse_comments_template]  

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