alt="" width="225" height="300" /> सूखा कुआं[/caption] हाथ में एक पतली नायलॉन की रस्सी लेकर उक्त ढांडी ( कच्चा कुआं) से पानी निकालते हैं और उसे छान कर पीने योग्य बनाते हैं. ढांडी के आस पास काफी गंदगी फैली हुई है. इसीसे अनुमान लगाया जा सकता है कि उस ढांडी का पानी कितना शुद्ध हो सकता है. फिर भी जीने के लिए पानी पीना पड़ता है. राजनीतिक नेताओं और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण क्षेत्रों में आदिवासी लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं.
धनबाद : बूंद बूंद के लिए तरस रहे आदिवासी गांव केसरगढ़ के लोग
Akshay Kumar Topchanchi : तोपचांची प्रखंड के नेरो पंचायत के केसरगढ़ गांव में लगभग 250 आदिवासी परिवार इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं. हालांकि गांव में 5 कुआं, 3 चापानल तथा 1 जल मीनार है. परंतु पानी नहीं है. भीषण गर्मी पर सब सूख चुके हैं. 14वें वित्त आयोग से केसरगढ़ गांव में जल मीनार का निर्माण कराया गया. कुछ घरों में पानी के लिए कनेक्शन दिया गया. लेकिन पानी पहुंच ही नहीं पाया. केसरगढ़ के लोग पेयजल तथा दैनिक जीवन चर्या के लिए गांव में निर्मित एक ढांडी ( कच्चा कुआं) पर निर्भर हैं. [caption id="attachment_663908" align="aligncenter" width="225"]
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alt="" width="225" height="300" /> सूखा कुआं[/caption] हाथ में एक पतली नायलॉन की रस्सी लेकर उक्त ढांडी ( कच्चा कुआं) से पानी निकालते हैं और उसे छान कर पीने योग्य बनाते हैं. ढांडी के आस पास काफी गंदगी फैली हुई है. इसीसे अनुमान लगाया जा सकता है कि उस ढांडी का पानी कितना शुद्ध हो सकता है. फिर भी जीने के लिए पानी पीना पड़ता है. राजनीतिक नेताओं और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण क्षेत्रों में आदिवासी लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं.
alt="" width="225" height="300" /> सूखा कुआं[/caption] हाथ में एक पतली नायलॉन की रस्सी लेकर उक्त ढांडी ( कच्चा कुआं) से पानी निकालते हैं और उसे छान कर पीने योग्य बनाते हैं. ढांडी के आस पास काफी गंदगी फैली हुई है. इसीसे अनुमान लगाया जा सकता है कि उस ढांडी का पानी कितना शुद्ध हो सकता है. फिर भी जीने के लिए पानी पीना पड़ता है. राजनीतिक नेताओं और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण क्षेत्रों में आदिवासी लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं.
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