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धनबाद : बूंद बूंद के लिए तरस रहे आदिवासी गांव केसरगढ़ के लोग

 
Akshay Kumar Topchanchi  :  तोपचांची प्रखंड के नेरो पंचायत के केसरगढ़ गांव में लगभग 250 आदिवासी परिवार इस भीषण गर्मी में बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं. हालांकि गांव में 5 कुआं,  3 चापानल तथा 1 जल मीनार है. परंतु  पानी नहीं है. भीषण गर्मी पर सब सूख चुके हैं. 14वें वित्त आयोग से केसरगढ़ गांव में जल मीनार का निर्माण कराया गया. कुछ घरों में पानी के लिए कनेक्शन दिया गया. लेकिन पानी पहुंच ही नहीं पाया. केसरगढ़ के लोग पेयजल तथा दैनिक जीवन चर्या के लिए गांव में निर्मित एक ढांडी ( कच्चा कुआं) पर निर्भर हैं.   [caption id="attachment_663908" align="aligncenter" width="225"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/sookha-kuan-top-225x300.jpeg"

alt="" width="225" height="300" /> सूखा कुआं[/caption] हाथ में एक पतली नायलॉन की रस्सी लेकर उक्त ढांडी ( कच्चा कुआं) से पानी निकालते हैं और उसे छान कर पीने योग्य बनाते हैं. ढांडी के आस पास काफी गंदगी फैली हुई है. इसीसे अनुमान लगाया जा सकता है कि उस ढांडी का पानी कितना शुद्ध हो सकता है. फिर भी जीने के लिए पानी पीना पड़ता है. राजनीतिक नेताओं और जिला प्रशासन की उदासीनता के कारण क्षेत्रों में आदिवासी लोग दूषित पानी पीने को विवश हैं.

 चुनाव के समय नेता करते हैं बड़े बड़े वादे

आदिवासी समुदाय के लोग कहते हैं कि चुनाव के समय नेता बड़े वादे लेकर गांव में आते हैं. परंतु चुनाव खत्म हो जाने के बाद सब कुछ भूल जाते हैं. सिर्फ लोगों को आश्वासन दिया जाता है.

 जिम्मेदार अब दे रहे हैं भरोसा

तोपचांची प्रखंड प्रमुख आंनद महतो ने बताया कि केसरगढ़ में जल की समस्या है "हर घर नल जल योजना" के तहत गांव में बोरिंग करवा कर पेयजल की व्यवस्था की जाएगी. साथ ही उन्होंने यह आश्वासन दिया कि सहायक अभियंता से बात करेंगे तथा गांव का विशेष ध्यान रखा जाएगा. [wpse_comments_template]
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