Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) जिले में ठंड का सीतम जारी है. आराम पसंद लोग, जहां गीजर, रूम हिटर के सहारे सर्दी को कम रहे हैं, वहीं गरीबों को ठंड की मार झेलनी पड़ रही है. फुटपाथ पर रात गुजारने वालों को देखने वाला भी कोई नहीं. सरकारी कंबल गोदाम की शोभा बढ़ा रहे है. जिले में अभी तक कितने लोगों को कंबल मिला, शहरी क्षेत्र में कंबल वितरण की क्या व्यवस्था है, यह बताने वाला कोई नहीं है. वितरण हो रहा है तो कहां, हो रहा है, इस बात की जानकारी भी नहीं मिल रही है. व्यवस्था ने गरीबों को असहाय छोड़ रखा है, जबकि सरकार की ओर से उन्हें ठंड से बचाने का उपाय भी कारगदर नहीं हो रहा..
सामाजिक सुरक्षा कोषांग के पास नहीं है आंकड़ा
सामाजिक सुरक्षा कोषांग की ओर से जिले में कंबल वितरण की व्यवस्था की गई है. कोषांग के कर्मियों के अनुसार इस साल जिले में 81 हजार 516 कंबल की खरीद हुई है. सभी प्रखंडों में वितरण का जिम्मा सप्लायर को दिया गया है. अवश्यकतानुसार प्रखंड में कंबल वितरण हो रहा है. अभी तक कितना कंबल वितरण हुआ है, यह जानकारी उनके पास नही है. इतना कहा जा सकता है कि अभी सभी लोगों को कंबल नहीं मिला है. मुखिया, बीडीओ, सीओ के जरिये आवश्यकता के अनुसार कंबल दिया जा रहा है. ठंड में ठिठुर रहे हैं गरीब व असहाय
जिले में ठंड ने विगत 13 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रात में बर्फीली हवाएं हाड़ कंपा रही हैं. शहर के बस डिपो, बैंक मोड़, हीरापुर, स्टील गेट, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर कई लोग बोरा ओढ़ कर सड़क किनारे रात गुजार रहे हैं. गुरुवार 5 जनवरी को रेलवे स्टेशन पर कुछ लोग धूप में सोये मिले. लोगों ने बताया कि वे भीख मंगाकर गुजारा करते हैं. ठंड में कहीं से कोई मदद नहीं मिली है. उनके साथ कुछ जानवर भी सोते हैं. रात में ठंड से बचने के लिए उन्हीं को पकड़ कर सो जाते हैं. शहर में अलाव की भी मुकम्मल व्यवस्था नहीं
शहरी क्षेत्र में अलाव की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई है. इधर निगम के अधिकारी कोताही बरत रहे हैं. रणधीर वर्मा और श्रमिक चौक को छोड़कर रात में कही भी अलावा की व्यवस्था नहीं है. सड़कों पर बसर करनेवाले लोग टायर, प्लास्टिक आदि जलाकर रात गुजार रहे है. भले ही उनके स्वास्थ्य के लिए यह हानिकारक है. यह सामाजिक सुरक्षा कोषांग का का काम : अपर समाहर्ता
अपर समाहर्ता नंदकिशोर गुप्ता कहते हैं कि कंबल वितरण का काम सामाजिक सुरक्षा कोषांग का है. हर साल बांटता है, इस साल भी बंट रहा होगा. हम सिर्फ अलाव की व्यवस्था करा रहे हैं. यह व्यवस्था भी अल्टरनेट है. हर दिन सभी जगह अलाव नहीं जलाए जा रहे हैं. दिन बीच करके चयनित स्थल पर लकड़ियां पहुंचाई जा रही हैं. [wpse_comments_template]
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