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धनबाद: सद्गुणों का अभ्यास व खुद को पवित्र रखना ही ब्रह्मचर्य : पं मुन्ना लाल

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दिगंबर जैन समाज के पर्यूषण महापर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा

Dhanbad : धैया स्थित जैन मंदिर में 28 सितंबर गुरुवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पूजा की गई. सवर्प्रथम नित्य दिन की तरह प्रातः में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व पूजन किया गया. शांतिधारा के पुण्यार्जक सुरेंद्र कुसुम जैन, आकाश अंशी जैन, महावीर मयंक बाकलीवाल और संतोष पंकज जैन थे. साथ ही 12वें तीर्थंकर बासुपूज्य भगवान का मोक्ष कल्याणक भी मनाया गया, जिसमें समाज के सभी लोगों ने निर्वाण लाडू चढ़या. संध्या 4 बजे 1008 शांतिनाथ भगवान का अभिषेक और शांति धारा की गई. अपने प्रवचन में पंडित मुन्ना लाल ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि व्यक्ति के उत्साह को जीवंत रखनेवाला ही ब्रह्मचर्य होता है. जिसका ब्रह्म क्षीण हो गया है, उसके जीवन में उत्साह भी भंग हो गया है. उमंग तभी तक है, जब तक शरीर में शक्ति है.  उमंग नष्ट होते ही शरीर की शक्ति भी क्षीण हो जाती है. सद्गुणों का अभ्यास करना और अपने को पवित्र रखना ही ब्रह्मचर्य है. सांप के काटने से आदमी बच सकता है, लेकिन काम के वाण से भेदा व्यक्ति कभी नही बच सकता. आज के कार्यक्रम में विजय गोधा, संजय गोधा,चक्रेश जैन, सुशील बाकलीवाल, रजत जैन, आकाश जैन, मनीष झाँझरी, मयंक बाकलीवाल, राखी जैन, कामना जैन, रिद्धि गोधा, रेशु जैन आदि मौजूद थे. [wpse_comments_template]

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