Topchanchi : सड़कें किसी भी देश के विकास का पैमाना होती हैं. भारत में राष्ट्रीय उच्च पथों (एनएच) का निर्माण तेजी से बढ़ा है. इसके साथ ही दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं. खासकर एनएच पर आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटना होती रहती हैं. कोलकाता से दिल्ली और उसके आगे पंजाब को जोड़ने वाला नेशनल हाइवे देश की महत्वपूर्ण सड़कों में शुमार है. आमतौर पर एनएच पर सफर के दौरान मोबाइल का नेटवर्क अचानक गायब हो जाता है. नेटवर्क नहीं रहने से व्यक्ति अपनों या जरूरी सुविधाओं के लिए किसी से संपर्क नहीं कर पाता है. यदि किसी तरह की दुर्धटना हुई और मोबाइल में नेटवर्क नहीं है, तो बड़ी मुश्किल में फंस जाते हैं. ऐसी आपात स्थिति में आसपास के अस्पताल, एंबुलेंस या पुलिस से संपर्क करने के लिए नेशनल हाइवे पर जगह-जगह पोल पर एसओएस बीट बॉक्स (SOS BEAT BOX) लगाए गए हैं. नेशनल हाइवे अथॉरिटी की गाइडलाइंस के अनुसार हाइवे पर 1 से 2 किलोमीटर पर एक SOS बॉक्स लगाए गए हैं. आपात स्थिति में इसके जरिए अस्पताल, एंबुलेंस या पुलिस से संपर्क कर मदद ली जा सकती है. यह भी पढ़ें :
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क्या है एसओएस बीट बॉक्स
एसओएस बॉक्स का फुल फॉर्म है सेव ऑवर सोल (save our soul) बॉक्स है. यह बॉक्स सोलर पावर से चलता है. इसलिए इसमें पावर की कोई समस्या नहीं होती है. आपातकाल में हाइवे पर सफर कर रहे लोगों को प्राथमिक उपचार पहुंचाने या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए इन बॉक्स का इस्तेमाल किया जाता है.
ऐसे करें बॉक्स का इस्तेमाल
एसओएस बीट बॉक्स में एक कॉल बटन होता है. आपात स्थिति में बटन दबाते ही सीधे कंट्रोल रूम में फोन लग जाता है. साथ ही पेट्रोलिंग करने वाले वाहन और एंबुलेंस को भी एसएमएस के जरिए सूचना मिल जाती है. बॉक्स में इनबिल्ट जीपीएस लगा होता है, जिससे उपयोगकर्ता की लोकेशन की जानकारी आसानी से मिल जाती है और इससे उनको सहायता जल्दी मिल जाती है. यह भी पढ़ें :
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